मंगलवार, 15 नवंबर 2016

महालक्ष्मी का एक ऐसा मंदिर जहाँ प्रसाद में मिलते हैं सोने के ज़ेवर

अभी तक आपने लोगों को मंदिर में सोना-चांदी चढ़ाते हुए देखा होगा लेकिन एक ऐसा मंदिर भी हैं जहाँ श्रृद्दालुओं को प्रसाद में सोने के ज़ेवर मिलते हैं। जी हाँ, मध्य प्रदेश के रतलाम में महालक्ष्मी का ऐसा खास मंदिर है जहाँ भक्तों को प्रसाद में सोना दिया जाता है। इस खास प्रसाद को पाने के लिए दूर-दराज से लोग आते हैं और लाइन में लगते हैं। इसी वजह से यहाँ भक्तों की भारी भीड़ जुटी रहती है।
इस मंदिर में साल के कुछ दिन कुबेर का दरबार लगता है। वैसे तो भक्त पूरे साल यहाँ आते हैं और अपनी श्रृद्धा से सोना-चांदी चढ़ाते हैं। खासकर धनतरेस और दीपावली को महालक्ष्मी के इस मंदिर में खूब सोना चढ़ाया जाता है और मां का श्रृंगार किया जाता है। लेकिन कुबेर दरबार वाले दिन भक्तों को आभूषण और नकदी प्रसाद के रूप में दिया जाता है। यहाँ चढ़ावे का पूरा हिसाब रखा जाता है।
मंदिर में इतना सोना चढ़ाने के लिहाज़ से सुरक्षा के भी पुख्ता इंतजाम रहते हैं। यहाँ हर तरफ सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं और पुलिस भी तैनात रहती है। मान्यता है कि अपनी सामर्थ्य के अनुसार यहाँ सोना-चांदी चढ़ाने से घर का भंडार कभी खाली नहीं रहता। वैसे भी चढ़ाव चढ़ाने वाला मंदिर से खाली हाथ वापस नहीं जाता। प्रसाद में यहां से मिलने वाले आभूषण या नकदी को लोग सँभालकर रखते हैं और कभी खर्च नहीं करते।

Source- india

गुरुवार, 10 नवंबर 2016

भारत में करंसी का इतिहास I History Of Indian Rupee In Hindi



1. भारत में करंसी का इतिहास 2500 साल पुराना हैं। इसकी शुरूआत एक राजा द्वारा की गई थी। 


2. अगर आपके पास आधे से ज्यादा (51 फीसदी) फटा हुआ नोट है तो भी आप बैंक में जाकर उसे बदल सकते हैं।
3. बात सन् 1917 की हैं, जब 1₹ रुपया 13$ डाॅलर के बराबर हुआ करता था। फिर 1947 में भारत आजाद हुआ, 1₹ = 1$ कर दिया गया. फिर धीरे-धीरे भारत पर कर्ज बढ़ने लगा तो इंदिरा गांधी ने कर्ज चुकाने के लिए रूपये की कीमत कम करने का फैसला लिया उसके बाद आज तक रूपये की कीमत घटती आ रही हैं।
4. अगर अंग्रेजों का बस चलता तो आज भारत की करंसी पाउंड होती. लेकिन रुपए की मजबूती के कारण ऐसा संभव नही हुआ।
5. इस समय भारत में 400 करोड़ रूपए के नकली नोट हैं।
6. सुरक्षा कारणों की वजह से आपको नोट के सीरियल नंबर में I, J, O, X, Y, Z अक्षर नही मिलेंगे।
7. हर भारतीय नोट पर किसी न किसी चीज की फोटो छपी होती हैं जैसे- 20 रुपए के नोट पर अंडमान आइलैंड की तस्वीर है। वहीं, 10 रुपए के नोट पर हाथी, गैंडा और शेर छपा हुआ है, जबकि 100 रुपए के नोट पर पहाड़ और बादल की तस्वीर है। इसके अलावा 500 रुपए के नोट पर आजादी के आंदोलन से जुड़ी 11 मूर्ति की तस्वीर छपी हैं।
8. भारतीय नोट पर उसकी कीमत 15 भाषाओं में लिखी जाती हैं।
9. 1₹ में 100 पैसे होगे, ये बात सन् 1957 में लागू की गई थी। पहले इसे 16 आने में बाँटा जाता था। ( सन् 1936 में बना 8 आनें का सिक्का मेरे पास भी हैं. )
10. RBI, ने जनवरी 1938 में पहली बार 5₹ की पेपर करंसी छापी थी. जिस पर किंग जार्ज-6 का चित्र था। इसी साल 10,000₹ का नोट भी छापा गया था लेकिन 1978 में इसे पूरी तरह बंद कर दिया गया।

11. आजादी के बाद पाकिस्तान ने तब तक भारतीय मुद्रा का प्रयोग किया जब तक उन्होनें काम चलाने लायक नोट न छाप लिए।
12. भारतीय नोट किसी आम कागज के नही, बल्कि काॅटन के बने होते हैं। ये इतने मजबूत होते हैं कि आप नए नोट के दोनो सिरों को पकड़कर उसे फाड़ नही सकते।
13. एक समय ऐसा था, जब बांग्लादेश ब्लेड बनाने के लिए भारत से 5 रूपए के सिक्के मंगाया करता था. 5 रूपए के एक सिक्के से 6 ब्लेड बनते थे. 1 ब्लेड की कीमत 2 रूपए होती थी तो ब्लेड बनाने वाले को अच्छा फायदा होता था. इसे देखते हुए भारत सरकार ने सिक्का बनाने वाला मेटल ही बदल दिया।
14. आजादी के बाद सिक्के तांबे के बनते थे। उसके बाद 1964 में एल्युमिनियम के और 1988 में स्टेनलेस स्टील के बनने शुरू हुए।

15. भारतीय नोट पर महात्मा गांधी की जो फोटो छपती हैं वह तब खीँची गई थी जब गांधीजी, तत्कालीन बर्मा और भारत में ब्रिटिश सेक्रेटरी के रूप में कार्यरत फ्रेडरिक पेथिक लॉरेंस के साथ कोलकाता स्थित वायसराय हाउस में मुलाकात करने गए थे। यह फोटो 1996 में नोटों पर छपनी शुरू हुई थी। इससे पहले महात्मा गांधी की जगह अशोक स्तंभ छापा जाता था।
16. भारत के 500 और 1,000 रूपये के नोट नेपाल में नही चलते।
17. 500₹ का पहला नोट 1987 में और 1,000₹ पहला नोट सन् 2000 में बनाया गया था।
18. भारत में 75, 100 और 1,000₹ के भी सिक्के छप चुके हैं।
19. 1₹ का नोट भारत सरकार द्वारा और 2 से1,000₹ तक के नोट RBI द्वारा जारी किये जाते हैं.
20. एक समय पर भ्रष्टाचार से लड़ने के लिए 0₹ का नोट 5thpillar नाम की गैर सरकारी संस्था द्वारा जारी किए गए थे

21. 10₹ के सिक्के को बनाने में 6.10₹ की लागतआती हैं.

22. नोटो पर सीरियल नंबर इसलिए डाला जाता हैं ताकि आरबीआई(RBI) को पता चलता रहे कि इस समय मार्केट में कितनी करंसी हैं।

23. रूपया भारत के अलावा इंडोनेशिया, मॉरीशस, नेपाल, पाकिस्तान और श्रीलंका की भी करंसी हैं।
24. According to RBI, भारत हर साल 2,000 करोड़ करंसी नोट छापता हैं।
25. कम्प्यूटर पर ₹ टाइप करने के लिए ‘Ctrl+Shift +$’ के बटन को एक साथ दबावें.
26. ₹ के इस चिन्ह को 2010 में उदय कुमार ने बनाया था। इसके लिए इनको 2.5 लाख रूपयें का इनाम भी मिला था।
27. क्या RBI जितना मर्जी चाहे उतनी कीमत के नोट छाप सकती हैं ? ऐसा नही हैं, कि RBI जितनी मर्जी चाहे उतनी
कीमत के नोट छाप सकती हैं, बल्कि वह सिर्फ 10,000₹ तक के नोट छाप सकती हैं। अगर इससे ज्यादा कीमत के नोट छापने हैं तो उसको रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया एक्ट, 1934 में बदलाव करना होगा।
28. जब हमारे पास मशीन हैं तो हम अनगणित नोट क्यों नही छाप सकते ? हम कितने नोट छाप सकते हैं इसका निर्धारण
मुद्रा स्फीति, जीडीपी ग्रोथ, बैंक नोट्स के रिप्लेसमेंट और रिजर्व बैंक के स्टॉक के आधार पर किया जाता है।
29. हर सिक्के पर सन् के नीचे एक खास निशान बना होता हैं आप उस निशान को देखकर पता लगा सकते हैं कि ये सिक्का कहाँ बना हैं.
मुंबई – हीरा [◆]
नोएडा – डाॅट [.]
हैदराबाद – सितारा [★]
कोलकाता – कोई निशान नहीं.

Source- samajikjankari

बुधवार, 2 नवंबर 2016

अंजीर कोफ्ता करी Anjeer Kofta Curry

अंजीर कोफ्ता करी खास अवसर पर बनाई जाने वाली पारंपरिक पंजाबी करी है। अंजीर से स्टफ किये हुये पनीर - आलू के मुलायम कोफ्ते आप सभी को बेहद पसंद आयेंगे।
आवश्यक सामग्री 
उबले आलू - 2
पनीर - 100 ग्राम
अंजीर - 4 (पानी में भीगे हुए)
कॉर्न फ्लोर - 2 टेबल स्पून
नमक - ½ छोटी चम्मच
काली मिर्च पाउडर - ¼ छोटी चम्मच
तेल - तलने के लिए और ग्रेवी बनाने के लिए

ग्रेवी बनाने के लिए सामग्री
टमाटर - 150 ग्राम टमाटर
हरी मिर्च - 2
काजू - 20-25
हरा धनियां - 2 टेबल स्पून (बारीक कटा हुआ)
अदरक पेस्ट - 1 छोटी चम्मच
जीरा -1 छोटी चम्मच
हल्दी पाउडर - 1/4 छोटी चम्मच
लाल मिर्च पाउडर - 1/4 छोटी चम्मच
गरम मसाला - 1/4 छोटी चम्मच
धनियां पाउडर - 1 छोटी चम्मच
नमक - स्वादानुसार (1 छोटी चम्मच)

विधि
उबले आलूओं को छील लीजिए। एक प्याले में आलू और पनीर को कद्दूकस कर लीजिए। इसमें नमक, काली मिर्च और थोड़ा सा हरा धनियां और कॉर्न फ्लोर डालकर सारी चीजें अच्छी तरह मिक्स कर लीजिये और इसे आटे की तरह गूंथ कर अच्छी तरह मसल-मसल कर चिकना करते हुए तैयार कर लीजिए। अंजीर को छोटे-छोटे टुकडों में काट लीजिए। 

एक गोले को उठाइये और हाथ पर रख कर उंगली और अंगूठे की सहायता से बड़ा कर लीजिये। अंजीर के 3-4 टुकडे़ गोले के ऊपर रखिये और चारों ओर से स्टफिंग को बंद कर दीजिए। गोले को हाथों से अच्छी तरह गोल करके प्लेट में रख दीजिए. इसी तरह सारे कोफ्ते भर कर तैयार कर लीजिये। 

कढ़ाई में तेल डाल कर गरम कीजिये. तेल पर्याप्त गरम होने पर 4-5 कोफ्ते गरम तेल में डालिये और गोल्डन ब्राउन होने तक तल कर, निकाल कर प्लेट में रखिये। सारे कोफ्ता इसी तरह तल कर निकाल लीजिये। 

कोफ्ते के लिये ग्रेवी

टमाटर, हरी मिर्च और काजू को मिक्सी से बारीक पीस लीजिये. कढाई में बचा तेल निकाल कर केवल 2 टेबल स्पून तेल रहने दीजिए। गरम तेल में जीरा डाल दीजिये. जीरा भूनने पर, हल्दी पाउडर, धनियां पाउडर डाल कर मसाले को थोडा़ सा भून लीजिए। अब इसमें अदरक का पेस्ट और टमाटर, काजू, हरी मिर्च का पेस्ट मसाले में डाल कर तब तक भूनिये जब तक, मसाला तेल न छोड़ने लगे, मसाले में लाल मिर्च पाउडर डाल दीजिए और बीच-बीच में चलाते हुए भूनें। 

मसाले से तेल अलग होने पर मसाला भून कर तैयार है इसमें 1 कप पानी डाल दीजिए, नमक, गरम मसाला और कटा हरा धनिया डाल कर मिक्स करते हुए एक उबाल आने तक पकाएं। ग्रेवी में उबाल आने के बाद गैस की आंच को धीमा कर दीजिए और ढककर के 3-4 मिनिट पकने दीजिए। 

ग्रेवी बनकर तैयार है, गैस बंद कर दीजिए और ग्रेवी को प्याले में निकल लीजिए व कोफ्ते डाल दीजिए, उपर से हरा धनियां डाल कर सजाइये। अंजीर कोफ्ता करी बनकर के तैयार है इसे आप चपाती, परांठे, नान, पूरी किसी के भी साथ परोसिये और खाइये।
Source- amarujala

गुरुवार, 27 अक्टूबर 2016

क्‍यूं मनाया जाता है धनतेरस और क्‍या है इसकी कहानी

हिंदू धर्म में धनतेरस का त्‍यौहार, कार्तिक माह के तीसरे दिन मनाया जाता है, जो दीवाली पर्व की शुरूआत माना जाता है। इस दिन, हिंदू परिवारों में मां लक्ष्‍मी की पूजा की जाती है।


धनतेरस के पावन पर्व पर, हिंदू परिवारों में कोई भी नया बर्तन खरीद कर लाया जाता है या चांदी अथवा सोने का सिक्‍का लाया जाता है और उसकी पूजा की जाती है। कहा जाता है कि इस दिन नए बर्तन या सिक्‍के को खरीद कर लाने और पूजा करने से घर में लक्ष्‍मी की बारिश होती है और घर में खूब धन-धान्‍य आता है।

धनतेरस पर मां लक्ष्‍मी के साथ-साथ भगवान कुबरे की भी पूजा की जाती है। इस दिन से ही दीवाली की शुरूआत हो जाती है। आइए जानते है कि धनतेरस का क्‍या महत्‍व है:


धनतेरस की दंतकथा

धनतेरस के बारे में दो दंतकथाएं है। ऐसा माना जाता है‍ कि समुद्र मंथन के दौरान, समुद्र से निकलने वाले नौ रत्‍नों में इसी दिन वैद्य धन्‍वतर का जन्‍म हुआ था। इस त्‍यौहार को हिंदू धर्म में बड़े त्‍यौहार के रूप में जाना जाता है।
धनतेरस के बारे में दूसरी कहानी ये है कि एक 16 वर्ष का राजकुमार था, जिसे हिमा के नाम से जाना जाता था। उसकी कुंडली में लिखा था कि उसकी शादी के चौथे दिन उसकी सांप काटने से मृत्‍यु हो जाएगी। राजुकमार की शादी हुई और उसी दिन उसकी पत्‍नी ने एक चाल खेली, उसने अपने सारे जेवरात और गहने उतार कर दरवाजे के आसपास फैला दिए और चौखट पर चांदी और सोने के सिक्‍के रखें, सभी जगहों पर तेज रोशनी कर दी। उसके बाद उसने अपने पति को सोने से बचाने के लिए कहानी सुनानी शुरू कर दी। यम आएं और कमरे में गहनों की चकाचौंध से सांप के रूप में बनने के बाद भी उसे डस नहीं पाएं। उस सांप की आंखे चमक के कारण खुल नहीं पाई और वह उसे काट नहीं पाया। रात भर वह दरवाजे पर बैठा रहा और उसकी पत्‍नी की कही हुई कहानी को सुनता रहा। सुबह होते ही सांप वापस चला गया और राजकुमार बच गया।
 धनतेरस का महत्‍व 
व्‍यापारियों के लिए धनतेरस का बहुत बड़ा महत्‍व होता है। इस दिन नई किताबें, सामान आदि खरीदा जाता है। कई लोग नए पेशे को भ इस दिन शुरू करना शुभ मानते हैं। कई परिवारों में धनतेरस के दिन बेटी का जन्‍म शुभ माना जाता है, ऐसा माना जाता है कि उनके घर में लक्ष्‍मी मां का जन्‍म हुआ।
Source -hindi.boldsky

गुरुवार, 20 अक्टूबर 2016

अनरसे - Anarsa Recipe

दीपावली का विशेष व्यंजन अनरसे (Anarse) है, सामान्यतया यह उत्तर भारत में अधिक प्रचलित है , अनरसे बनाने के लिये 2 दिन पहले चावल भिगोने पड़ते हैं. 
आइये अनरसे बनाना शुरू करते हैं.


आवश्यक सामग्री 

  • छोटा चावल - 300 ग्राम ( 1 1/2 कप )
  • पाउडर चीनी - 100 ग्राम ( आधा कप )
  • दही या दूध - 1 टेबल स्पून
  • घी - 2 टेबल स्पून
  • तिल -2 टेबल स्पून
  • तलने के लिये - घी

विधि 

छोटे, नये चावल ले लीजिये, चावलों को साफ कीजिये, धोइये और भिगो दीजिये. चावल 3 दिनों तक भीगे रखने हैं लेकिन 24 घंटे बाद पानी बदल दीजिये.
अब चावलों में से पानी निकाल दीजिये, चावलों को किसी साफ मोटे सूती कपड़े के ऊपर छाया में फैला दीजिये, 1 या 1 1/2 घंटे में चावलों का पानी सूख जाता है(चावल पूरी तरह नहीं सूखने चाहिये वे नम ही रहें).
इन चावलों को मिक्सी से मोटा आटे जैसा पीस कर एक बर्तन में निकाल लीजिये,  आटे को छ्लनी में छाना जा सकता है. चीनी पाउडर, चावल का पिसा आटा और घी को अच्छी तरह मिलाइये. दही को मथ कर या दूध चम्मच से थोड़ा डालिये और इस मिश्रण को इसी दही या दूध की सहायता से सख्त आटे की तरह गूथ लीजिये. आटे को 10 - 12  घंटे के लिये ढक कर रख दीजिये, आटा नरम हो कर सैट हो जाता है.
कढ़ाई में घी डाल कर गरम कीजिये(कढ़ाई में घी इतना डालिये कि अनरसे अच्छी तरह डुब कर तले जा सकें).
गोल अनरसे बनाने के लिये आटे से छोटी छोटी लोइयां लेकर, तिल में लपेट कर, गोल करके, 4-5 अनरसे कढ़ाई में डालिये, करछी से हिला डुला कर ब्राउन होने तक तल लीजिये, तले हुये अनरसे प्लेट में नैपकिन पेपर बिछा कर रखिये और अनरसे बनाकर फिर से घी में डालिये इन्हैं भी तल कर निकाल लीजिये, इसी तरह सारे आटे से अनरसे बनाकर तैयार कर लीजिये. गरमा गरम अनरसे तैयार हैं.
चपटे अनरसे के लिये आटे से छोटी छोटी लोइयां बनायें, तिल में लपेटे, फिर से गोल करें तिल आटे में पूरी तरह चिपक जायं, अब हथेली से दबाकर चपटा कीजिये,  गरम घी में डालिये, एक बार में 2-3 -4 अनरसे बना कर घी में डाल दीजिये, अनरसे के ऊपर गरम घी उछाल कर, या हल्के हाथ से पलट कर, हल्का ब्राउन होने तक तल लीजिये. तले हुये अनरसे प्लेट में नेपकिन पेपर बिछाकर, निकाल कर रखिये. दूसरे अनरसे बनाकर फिर से घी में डालिये और तल कर निकाल लीजिये, इसी तरह सारे आटे से अनरसे बनाकर तैयार कर लीजिये. लीजिये गरमा गरम अनरसे तैयार हैं.
आप इन अनरसों को अभी खाइये बहुत स्वादिष्ट बने हैं. ठंडे होने पर कन्टेनर में भरकर रख दीजिये और फिर 15 दिन तक कभी भी खाइये.

रविवार, 16 अक्टूबर 2016

करवा चौथ की पूजन विधि और व्रत कथा

कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को करवा चौथ का व्रत किया जाता है। इस दिन विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। करवा चौथ के व्रत का पूर्ण विर्ण वामन पुराण में किया गया है।


करवा चौथ पूजा विधि

नारद पुराण के अनुसार इस दिन भगवान गणेश की पूजा करनी चाहिए। करवा चौथ की पूजा करने के लिए बालू या सफेद मिट्टी की एक वेदी बनाकर भगवान शिव- देवी पार्वती, स्वामी कार्तिकेय, चंद्रमा एवं गणेशजी को स्थापित कर उनकी विधिपूर्वक पूजा करनी चाहिए।

पूजा के बाद करवा चौथ की कथा सुननी चाहिए तथा चंद्रमा को अर्घ्य देकर छलनी से अपने पति को देखना चाहिए। पति के हाथों से ही पानी पीकर व्रत खोलना चाहिए। इस प्रकार व्रत को सोलह या बारह वर्षों तक करके उद्यापन कर देना चाहिए।

चन्द्रोदय समय 

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार करवा चौथ के दिन शाम के समय चन्द्रमा को अर्घ्य देकर ही व्रत खोला जाता है। इस दिन बिना चन्द्रमा को अर्घ्य दिए व्रत तोड़ना अशुभ माना जाता है। वर्ष 2016 में पूजा और चन्द्रमा निकलने का समय निम्न है:

साल 2016 में करवा चौथ के दिन पूजा का शुभ मुहूर्त : शाम 05 बजकर 43 मिनट से लेकर 06 बजकर 59 मिनट तक

करवा चौथ के दिन चंद्रोदय: रात 08.51 बजे

महिलाओं के अखंड सौभाग्य का प्रतीक करवा चौथ व्रत की कथा कुछ इस प्रकार है- एक साहूकार के सात लड़के और एक लड़की थी। एक बार कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को सेठानी सहित उसकी सातों बहुएं और उसकी बेटी ने भी करवा चौथ का व्रत रखा। रात्रि के समय जब साहूकार के सभी लड़के भोजन करने बैठे तो उन्होंने अपनी बहन से भी भोजन कर लेने को कहा। इस पर बहन ने कहा- भाई, अभी चांद नहीं निकला है। चांद के निकलने पर उसे अर्घ्य देकर ही मैं आज भोजन करूंगी।

साहूकार के बेटे अपनी बहन से बहुत प्रेम करते थे, उन्हें अपनी बहन का भूख से व्याकुल चेहरा देख बेहद दुख हुआ। साहूकार के बेटे नगर के बाहर चले गए और वहां एक पेड़ पर चढ़ कर अग्नि जला दी। घर वापस आकर उन्होंने अपनी बहन से कहा- देखो बहन, चांद निकल आया है। अब तुम उन्हें अर्घ्य देकर भोजन ग्रहण करो। साहूकार की बेटी ने अपनी भाभियों से कहा- देखो, चांद निकल आया है, तुम लोग भी अर्घ्य देकर भोजन कर लो। ननद की बात सुनकर भाभियों ने कहा- बहन अभी चांद नहीं निकला है, तुम्हारे भाई धोखे से अग्नि जलाकर उसके प्रकाश को चांद के रूप में तुम्हें दिखा रहे हैं।

साहूकार की बेटी अपनी भाभियों की बात को अनसुनी करते हुए भाइयों द्वारा दिखाए गए चांद को अर्घ्य देकर भोजन कर लिया। इस प्रकार करवा चौथ का व्रत भंग करने के कारण विघ्नहर्ता भगवान श्री गणेश साहूकार की लड़की पर अप्रसन्न हो गए। गणेश जी की अप्रसन्नता के कारण उस लड़की का पति बीमार पड़ गया और घर में बचा हुआ सारा धन उसकी बीमारी में लग गया।

साहूकार की बेटी को जब अपने किए हुए दोषों का पता लगा तो उसे बहुत पश्चाताप हुआ। उसने गणेश जी से क्षमा प्रार्थना की और फिर से विधि-विधान पूर्वक चतुर्थी का व्रत शुरू कर दिया। उसने उपस्थित सभी लोगों का श्रद्धानुसार आदर किया और तदुपरांत उनसे आशीर्वाद ग्रहण किया।

इस प्रकार उस लड़की के श्रद्धा-भक्ति को देखकर एकदंत भगवान गणेश जी उसपर प्रसन्न हो गए और उसके पति को जीवनदान प्रदान किया। उसे सभी प्रकार के रोगों से मुक्त करके धन, संपत्ति और वैभव से युक्त कर दिया।

कहते हैं इस प्रकार यदि कोई मनुष्य छल-कपट, अहंकार, लोभ, लालच को त्याग कर श्रद्धा और भक्तिभाव पूर्वक चतुर्थी का व्रत को पूर्ण करता है, तो वह जीवन में सभी प्रकार के दुखों और क्लेशों से मुक्त होता है और सुखमय जीवन व्यतीत करता है।

गुरुवार, 13 अक्टूबर 2016

कमजोरी मिटाने में नंबर 1 है, ये 10 घरेलू ड्रिंक

दिनभर की भागदौड़ और सही डाइट न लेने के कारण अक्सर थकान और कमजोरी हो जाती है। इसे दूर करने के लिए घर में ही कुछ ऐसी चीजें मौजूद होती हैं, जिन्हें सही तरीके यूज करके कमजोरी को दूर किया जा सकता है। यहां नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद, जयपुर के डॉ. गोविंद पारिकबता रहे हैं कमजोरी दूर करने में मददगार ऐसी 10 घरेलू ड्रिंक्स के बारे में।


खांसी, जकड़न और सर्दी को दूर भगाने वाला घरेलू उपचार




Benefits of Jeera (Cumin) | जीरा खाने का स्‍वास्‍थ्‍य लाभ





Source - bhaskar

सोमवार, 26 सितंबर 2016

नवरात्रि क्या है?

नवरात्र या नवरात्रि?

संस्कृत व्याकरण के अनुसार 'नवरात्रि' कहना त्रुटिपूर्ण है। 9 रात्रियों का समाहार, समूह होने के कारण से द्वंद समास होने के कारण यह शब्द पुल्लिंग रूप 'नवरात्र' में ही शुद्ध है।



नवरात्र क्या है?

पृथ्वी द्वारा सूर्य की परिक्रमा के काल में 1 साल की 4 संधियां हैं। उनमें मार्च व सितंबर माह में पड़ने वाली गोल संधियों में साल के 2 मुख्य नवरात्र पड़ते हैं। इस समय रोगाणु आक्रमण की सर्वाधिक आशंका होती है। ऋतु संधियों में अक्सर शारीरिक बीमारियां बढ़ती हैं अत: उस समय स्वस्थ रहने के लिए, शरीर को शुद्ध रखने के लिए और तन-मन को निर्मल और पूर्णत: स्वस्थ रखने के लिए की जाने वाली प्रक्रिया का नाम 'नवरात्र' है।

नौ दिन या रात

अमावस्या की रात से अष्टमी तक या प्रतिपदा से नवमी की दोपहर तक व्रत-नियम चलने से नौ रात यानी 'नवरात्र' नाम सार्थक है। यहां रात गिनते हैं इसलिए नवरात्र यानी नौ रातों का समूह कहा जाता है। रूपक द्वारा हमारे शरीर को 9 मुख्य द्वारों वाला कहा गया है। इसके भीतर निवास करने वाली जीवनी शक्ति का नाम ही दुर्गा देवी है।

इन मुख्य इन्द्रियों के अनुशासन, स्वच्छ्ता, तारतम्य स्थापित करने के प्रतीक रूप में शरीर तंत्र को पूरे साल के लिए सुचारु रूप से क्रियाशील रखने के लिए 9 द्वारों की शुद्धि का पर्व 9 दिन मनाया जाता है। इनको व्यक्तिगत रूप से महत्व देने के लिए 9 दिन 9 दुर्गाओं के लिए कहे जाते हैं।

शरीर को सुचारु रखने के लिए विरेचन, सफाई या शुद्धि प्रतिदिन तो हम करते ही हैं किंतु अंग-प्रत्यंगों की पूरी तरह से भीतरी सफाई करने के लिए हर 6 माह के अंतर से सफाई अभियान चलाया जाता है। सात्विक आहार के व्रत का पालन करने से शरीर की शुद्धि, साफ-सुथरे शरीर में शुद्ध बुद्धि, उत्तम विचारों से ही उत्तम कर्म, कर्मों से सच्चरित्रता और क्रमश: मन शुद्ध होता है। स्वच्छ मन-मंदिर में ही तो ईश्वर की शक्ति का स्थायी निवास होता है।

 जानिए नवरात्र का वैज्ञानिक-आध्यात्मिक रहस्य

भारत के प्राचीन ऋषि-मुनियों ने रात्रि को दिन की अपेक्षा अधिक महत्व दिया है इसलिए दीपावली, होलिका, शिवरात्रि और नवरात्र आदि उत्सवों को रात में ही मनाने की परंपरा है। यदि रात्रि का कोई विशेष रहस्य न होता तो ऐसे उत्सवों को 'रात्रि' न कहकर 'दिन' ही कहा जाता लेकिन नवरात्र के दिन, 'नवदिन' नहीं कहे जाते।

मनीषियों ने वर्ष में 2 बार नवरात्रों का विधान बनाया है। विक्रम संवत के पहले दिन अर्थात चैत्र मास शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा (पहली तिथि) से 9 दिन अर्थात नवमी तक और इसी प्रकार ठीक 6 मास बाद आश्विन मास शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से महानवमी अर्थात विजयादशमी के 1 दिन पूर्व तक। परंतु सिद्धि और साधना की दृष्टि से शारदीय नवरात्रों को ज्यादा महत्वपूर्ण माना गया है।

इन नवरात्रों में लोग अपनी आध्यात्मिक और मानसिक शक्ति संचय करने के लिए अनेक प्रकार के व्रत, संयम, नियम, यज्ञ, भजन, पूजन, योग-साधना आदि करते हैं। कुछ साधक इन रात्रियों में पूरी रात पद्मासन या सिद्धासन में बैठकर आंतरिक त्राटक या बीज मंत्रों के जाप द्वारा विशेष सिद्धियां प्राप्त करने का प्रयास करते हैं।

नवरात्रों में शक्ति की 51 पीठों पर भक्तों का समुदाय बड़े उत्साह से शक्ति की उपासना के लिए एकत्रित होता है। जो उपासक इन शक्तिपीठों पर नहीं पहुंच पाते, वे अपने निवास स्थल पर ही शक्ति का आह्वान करते हैं।

आजकल अधिकांश उपासक शक्ति पूजा रात्रि में नहीं, पुरोहित को दिन में ही बुलाकर संपन्न करा देते हैं। सामान्य भक्त ही नहीं, पंडित और साधु-महात्मा भी अब नवरात्रों में पूरी रात जागना नहीं चाहते और न ही कोई आलस्य को त्यागना चाहता है। बहुत कम उपासक आलस्य को त्यागकर आत्मशक्ति, मानसिक शक्ति और यौगिक शक्ति की प्राप्ति के लिए रात्रि के समय का उपयोग करते देखे जाते हैं।

मनीषियों ने नवरात्रि के महत्व को अत्यंत सूक्ष्मता के साथ वैज्ञानिक परिप्रेक्ष्य में समझने और समझाने का प्रयत्न किया। रात्रि में प्रकृति के बहुत सारे अवरोध खत्म हो जाते हैं। आधुनिक विज्ञान भी इस बात से सहमत है। हमारे ऋषि-मुनि आज से कितने ही हजारों वर्ष पूर्व ही प्रकृति के इन वैज्ञानिक रहस्यों को जान चुके थे।

दिन में आवाज दी जाए तो वह दूर तक नहीं जाएगी किंतु रात्रि को आवाज दी जाए तो वह बहुत दूर तक जाती है। इसके पीछे दिन के कोलाहल के अलावा एक वैज्ञानिक तथ्य यह भी है कि दिन में सूर्य की किरणें आवाज की तरंगों और रेडियो तरंगों को आगे बढ़ने से रोक देती हैं। रेडियो इस बात का जीता-जागता उदाहरण है। कम शक्ति के रेडियो स्टेशनों को दिन में पकड़ना अर्थात सुनना मुश्किल होता है, जबकि सूर्यास्त के बाद छोटे से छोटा रेडियो स्टेशन भी आसानी से सुना जा सकता है।

वैज्ञानिक सिद्धांत यह है कि सूर्य की किरणें दिन के समय रेडियो तरंगों को जिस प्रकार रोकती हैं, उसी प्रकार मंत्र जाप की विचार तरंगों में भी दिन के समय रुकावट पड़ती है इसीलिए ऋषि-मुनियों ने रात्रि का महत्व दिन की अपेक्षा बहुत अधिक बताया है। मंदिरों में घंटे और शंख की आवाज के कंपन से दूर-दूर तक वातावरण कीटाणुओं से रहित हो जाता है। यह रात्रि का वैज्ञानिक रहस्य है। जो इस वैज्ञानिक तथ्य को ध्यान में रखते हुए रात्रियों में संकल्प और उच्च अवधारणा के साथ अपने शक्तिशाली विचार तरंगों को वायुमंडल में भेजते हैं, उनकी कार्यसिद्धि अर्थात मनोकामना सिद्धि, उनके शुभ संकल्प के अनुसार उचित समय और ठीक विधि के अनुसार करने पर अवश्य होती है।

Source-webdunia

गुरुवार, 8 सितंबर 2016

हल्दी से बैक्टीरिया फ्री होंगी सब्जियां


सब्जियों और फलों को बैक्टीरिया अौर पेस्टीसाइड्स फ्री करने के लिए सिर्फ पानी से धो लेना ही काफी नहीं होता। हम बता रहे हैं यहां 4 उपाय ...

1. हल्दी करेगी बैक्टीरिया दूर

हल्दी में एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं। इसलिए सब्जियों और फलों को बैक्टीरिया फ्री करने में हल्दी का उपयोग करें। एक बाउल में सब्जियों या फलों की मात्रा के हिसाब से पानी लें और उसे गर्म कर लें। इसमें पांच छोटे चम्मच हल्दी मिक्स करें। अब पांच मिनट के लिए सब्जियों और फलों को इसमें डालकर रखें। इसके बाद साफ पानी से धो लें।

2. सफेद सिरके से साफ करें फल-सब्जियां

सिरके से सभी तरह के कीटाणु और कीटनाशक (पेस्टीसाइड्स) साफ किए जा सकते हैं। इसके लिए एक बाउल में पानी और एक कप सफेद सिरका डालें। इस पानी से सब्जियों को धोकर साफ करें।

3. बेकिंग सोडे का यूज करें

एक बाउल में पांच गिलास पानी भरें। इसमें चार चम्मच बेकिंग सोडा मिलाएं और फल, सब्जियों को डुबो दें। कुछ देर बाद बाउल से निकालें और यूज करें।

4. सेंधा नमक मिले पानी से धोएं फल-सब्जियां

सेंधा नमक को पानी में मिलाकर प्रयोग करने से भी पेस्टीसाइड्स दूर होते हैं। साफ पानी के बाउल में एक कप नमक मिला लें। फिर इसमें फल व सब्जियों को डालकर दस मिनट के लिए भिगो दें। कुछ देर बाद इन्हें निकालकर साफ पानी से धोएं और यूज करें।


चाय की पत्ती से सफाई होगी आसान

घर में बची हुई चाय की पत्ती, इमली का पानी और केले के छिलकों से किस तरह हो सकती है सफाई, जानिए..... 

1. चाय की पत्ती से सफाई होगी आसान चाय बनाने के बाद बची हुई चाय की पत्ती को एक बार फिर से पानी डालकर उबालें। पानी को ठंडा करके छान लें।इससे गिलास और मिरर की सफाई करें और मनचाही चमक पाएं।

2. इमली के पानी से साफ होंगे बर्तन किचन सिंक की सफाई के लिए इमली के पानी में नमक मिलाएं और साफ करें। नल की टोंटियों को साफ  करने के लिए नमक और इमली का पानी इस्तेमाल कर सकते हैं। इस पानी का उपयोग चांदी के बर्तनों को साफ करने में भी किया जाता है।इससे बर्तन चमक उठेंगे।

3. केले के छिलकों से ऐसे चमकाएं जूते अगर घर में शु पॉलिश खत्म हो गई है तो अपने जूतों पर केले के छिलकों को रब कर लें और सूखे कपड़े से पोंछ लें। इससे आपके जूते चमक जाएंगे।