गुरुवार, 27 अक्टूबर 2016

क्‍यूं मनाया जाता है धनतेरस और क्‍या है इसकी कहानी

हिंदू धर्म में धनतेरस का त्‍यौहार, कार्तिक माह के तीसरे दिन मनाया जाता है, जो दीवाली पर्व की शुरूआत माना जाता है। इस दिन, हिंदू परिवारों में मां लक्ष्‍मी की पूजा की जाती है।


धनतेरस के पावन पर्व पर, हिंदू परिवारों में कोई भी नया बर्तन खरीद कर लाया जाता है या चांदी अथवा सोने का सिक्‍का लाया जाता है और उसकी पूजा की जाती है। कहा जाता है कि इस दिन नए बर्तन या सिक्‍के को खरीद कर लाने और पूजा करने से घर में लक्ष्‍मी की बारिश होती है और घर में खूब धन-धान्‍य आता है।

धनतेरस पर मां लक्ष्‍मी के साथ-साथ भगवान कुबरे की भी पूजा की जाती है। इस दिन से ही दीवाली की शुरूआत हो जाती है। आइए जानते है कि धनतेरस का क्‍या महत्‍व है:


धनतेरस की दंतकथा

धनतेरस के बारे में दो दंतकथाएं है। ऐसा माना जाता है‍ कि समुद्र मंथन के दौरान, समुद्र से निकलने वाले नौ रत्‍नों में इसी दिन वैद्य धन्‍वतर का जन्‍म हुआ था। इस त्‍यौहार को हिंदू धर्म में बड़े त्‍यौहार के रूप में जाना जाता है।
धनतेरस के बारे में दूसरी कहानी ये है कि एक 16 वर्ष का राजकुमार था, जिसे हिमा के नाम से जाना जाता था। उसकी कुंडली में लिखा था कि उसकी शादी के चौथे दिन उसकी सांप काटने से मृत्‍यु हो जाएगी। राजुकमार की शादी हुई और उसी दिन उसकी पत्‍नी ने एक चाल खेली, उसने अपने सारे जेवरात और गहने उतार कर दरवाजे के आसपास फैला दिए और चौखट पर चांदी और सोने के सिक्‍के रखें, सभी जगहों पर तेज रोशनी कर दी। उसके बाद उसने अपने पति को सोने से बचाने के लिए कहानी सुनानी शुरू कर दी। यम आएं और कमरे में गहनों की चकाचौंध से सांप के रूप में बनने के बाद भी उसे डस नहीं पाएं। उस सांप की आंखे चमक के कारण खुल नहीं पाई और वह उसे काट नहीं पाया। रात भर वह दरवाजे पर बैठा रहा और उसकी पत्‍नी की कही हुई कहानी को सुनता रहा। सुबह होते ही सांप वापस चला गया और राजकुमार बच गया।
 धनतेरस का महत्‍व 
व्‍यापारियों के लिए धनतेरस का बहुत बड़ा महत्‍व होता है। इस दिन नई किताबें, सामान आदि खरीदा जाता है। कई लोग नए पेशे को भ इस दिन शुरू करना शुभ मानते हैं। कई परिवारों में धनतेरस के दिन बेटी का जन्‍म शुभ माना जाता है, ऐसा माना जाता है कि उनके घर में लक्ष्‍मी मां का जन्‍म हुआ।
Source -hindi.boldsky

गुरुवार, 20 अक्टूबर 2016

अनरसे - Anarsa Recipe

दीपावली का विशेष व्यंजन अनरसे (Anarse) है, सामान्यतया यह उत्तर भारत में अधिक प्रचलित है , अनरसे बनाने के लिये 2 दिन पहले चावल भिगोने पड़ते हैं. 
आइये अनरसे बनाना शुरू करते हैं.


आवश्यक सामग्री 

  • छोटा चावल - 300 ग्राम ( 1 1/2 कप )
  • पाउडर चीनी - 100 ग्राम ( आधा कप )
  • दही या दूध - 1 टेबल स्पून
  • घी - 2 टेबल स्पून
  • तिल -2 टेबल स्पून
  • तलने के लिये - घी

विधि 

छोटे, नये चावल ले लीजिये, चावलों को साफ कीजिये, धोइये और भिगो दीजिये. चावल 3 दिनों तक भीगे रखने हैं लेकिन 24 घंटे बाद पानी बदल दीजिये.
अब चावलों में से पानी निकाल दीजिये, चावलों को किसी साफ मोटे सूती कपड़े के ऊपर छाया में फैला दीजिये, 1 या 1 1/2 घंटे में चावलों का पानी सूख जाता है(चावल पूरी तरह नहीं सूखने चाहिये वे नम ही रहें).
इन चावलों को मिक्सी से मोटा आटे जैसा पीस कर एक बर्तन में निकाल लीजिये,  आटे को छ्लनी में छाना जा सकता है. चीनी पाउडर, चावल का पिसा आटा और घी को अच्छी तरह मिलाइये. दही को मथ कर या दूध चम्मच से थोड़ा डालिये और इस मिश्रण को इसी दही या दूध की सहायता से सख्त आटे की तरह गूथ लीजिये. आटे को 10 - 12  घंटे के लिये ढक कर रख दीजिये, आटा नरम हो कर सैट हो जाता है.
कढ़ाई में घी डाल कर गरम कीजिये(कढ़ाई में घी इतना डालिये कि अनरसे अच्छी तरह डुब कर तले जा सकें).
गोल अनरसे बनाने के लिये आटे से छोटी छोटी लोइयां लेकर, तिल में लपेट कर, गोल करके, 4-5 अनरसे कढ़ाई में डालिये, करछी से हिला डुला कर ब्राउन होने तक तल लीजिये, तले हुये अनरसे प्लेट में नैपकिन पेपर बिछा कर रखिये और अनरसे बनाकर फिर से घी में डालिये इन्हैं भी तल कर निकाल लीजिये, इसी तरह सारे आटे से अनरसे बनाकर तैयार कर लीजिये. गरमा गरम अनरसे तैयार हैं.
चपटे अनरसे के लिये आटे से छोटी छोटी लोइयां बनायें, तिल में लपेटे, फिर से गोल करें तिल आटे में पूरी तरह चिपक जायं, अब हथेली से दबाकर चपटा कीजिये,  गरम घी में डालिये, एक बार में 2-3 -4 अनरसे बना कर घी में डाल दीजिये, अनरसे के ऊपर गरम घी उछाल कर, या हल्के हाथ से पलट कर, हल्का ब्राउन होने तक तल लीजिये. तले हुये अनरसे प्लेट में नेपकिन पेपर बिछाकर, निकाल कर रखिये. दूसरे अनरसे बनाकर फिर से घी में डालिये और तल कर निकाल लीजिये, इसी तरह सारे आटे से अनरसे बनाकर तैयार कर लीजिये. लीजिये गरमा गरम अनरसे तैयार हैं.
आप इन अनरसों को अभी खाइये बहुत स्वादिष्ट बने हैं. ठंडे होने पर कन्टेनर में भरकर रख दीजिये और फिर 15 दिन तक कभी भी खाइये.

रविवार, 16 अक्टूबर 2016

करवा चौथ की पूजन विधि और व्रत कथा

कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को करवा चौथ का व्रत किया जाता है। इस दिन विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। करवा चौथ के व्रत का पूर्ण विर्ण वामन पुराण में किया गया है।


करवा चौथ पूजा विधि

नारद पुराण के अनुसार इस दिन भगवान गणेश की पूजा करनी चाहिए। करवा चौथ की पूजा करने के लिए बालू या सफेद मिट्टी की एक वेदी बनाकर भगवान शिव- देवी पार्वती, स्वामी कार्तिकेय, चंद्रमा एवं गणेशजी को स्थापित कर उनकी विधिपूर्वक पूजा करनी चाहिए।

पूजा के बाद करवा चौथ की कथा सुननी चाहिए तथा चंद्रमा को अर्घ्य देकर छलनी से अपने पति को देखना चाहिए। पति के हाथों से ही पानी पीकर व्रत खोलना चाहिए। इस प्रकार व्रत को सोलह या बारह वर्षों तक करके उद्यापन कर देना चाहिए।

चन्द्रोदय समय 

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार करवा चौथ के दिन शाम के समय चन्द्रमा को अर्घ्य देकर ही व्रत खोला जाता है। इस दिन बिना चन्द्रमा को अर्घ्य दिए व्रत तोड़ना अशुभ माना जाता है। वर्ष 2016 में पूजा और चन्द्रमा निकलने का समय निम्न है:

साल 2016 में करवा चौथ के दिन पूजा का शुभ मुहूर्त : शाम 05 बजकर 43 मिनट से लेकर 06 बजकर 59 मिनट तक

करवा चौथ के दिन चंद्रोदय: रात 08.51 बजे

महिलाओं के अखंड सौभाग्य का प्रतीक करवा चौथ व्रत की कथा कुछ इस प्रकार है- एक साहूकार के सात लड़के और एक लड़की थी। एक बार कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को सेठानी सहित उसकी सातों बहुएं और उसकी बेटी ने भी करवा चौथ का व्रत रखा। रात्रि के समय जब साहूकार के सभी लड़के भोजन करने बैठे तो उन्होंने अपनी बहन से भी भोजन कर लेने को कहा। इस पर बहन ने कहा- भाई, अभी चांद नहीं निकला है। चांद के निकलने पर उसे अर्घ्य देकर ही मैं आज भोजन करूंगी।

साहूकार के बेटे अपनी बहन से बहुत प्रेम करते थे, उन्हें अपनी बहन का भूख से व्याकुल चेहरा देख बेहद दुख हुआ। साहूकार के बेटे नगर के बाहर चले गए और वहां एक पेड़ पर चढ़ कर अग्नि जला दी। घर वापस आकर उन्होंने अपनी बहन से कहा- देखो बहन, चांद निकल आया है। अब तुम उन्हें अर्घ्य देकर भोजन ग्रहण करो। साहूकार की बेटी ने अपनी भाभियों से कहा- देखो, चांद निकल आया है, तुम लोग भी अर्घ्य देकर भोजन कर लो। ननद की बात सुनकर भाभियों ने कहा- बहन अभी चांद नहीं निकला है, तुम्हारे भाई धोखे से अग्नि जलाकर उसके प्रकाश को चांद के रूप में तुम्हें दिखा रहे हैं।

साहूकार की बेटी अपनी भाभियों की बात को अनसुनी करते हुए भाइयों द्वारा दिखाए गए चांद को अर्घ्य देकर भोजन कर लिया। इस प्रकार करवा चौथ का व्रत भंग करने के कारण विघ्नहर्ता भगवान श्री गणेश साहूकार की लड़की पर अप्रसन्न हो गए। गणेश जी की अप्रसन्नता के कारण उस लड़की का पति बीमार पड़ गया और घर में बचा हुआ सारा धन उसकी बीमारी में लग गया।

साहूकार की बेटी को जब अपने किए हुए दोषों का पता लगा तो उसे बहुत पश्चाताप हुआ। उसने गणेश जी से क्षमा प्रार्थना की और फिर से विधि-विधान पूर्वक चतुर्थी का व्रत शुरू कर दिया। उसने उपस्थित सभी लोगों का श्रद्धानुसार आदर किया और तदुपरांत उनसे आशीर्वाद ग्रहण किया।

इस प्रकार उस लड़की के श्रद्धा-भक्ति को देखकर एकदंत भगवान गणेश जी उसपर प्रसन्न हो गए और उसके पति को जीवनदान प्रदान किया। उसे सभी प्रकार के रोगों से मुक्त करके धन, संपत्ति और वैभव से युक्त कर दिया।

कहते हैं इस प्रकार यदि कोई मनुष्य छल-कपट, अहंकार, लोभ, लालच को त्याग कर श्रद्धा और भक्तिभाव पूर्वक चतुर्थी का व्रत को पूर्ण करता है, तो वह जीवन में सभी प्रकार के दुखों और क्लेशों से मुक्त होता है और सुखमय जीवन व्यतीत करता है।

गुरुवार, 13 अक्टूबर 2016

कमजोरी मिटाने में नंबर 1 है, ये 10 घरेलू ड्रिंक

दिनभर की भागदौड़ और सही डाइट न लेने के कारण अक्सर थकान और कमजोरी हो जाती है। इसे दूर करने के लिए घर में ही कुछ ऐसी चीजें मौजूद होती हैं, जिन्हें सही तरीके यूज करके कमजोरी को दूर किया जा सकता है। यहां नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद, जयपुर के डॉ. गोविंद पारिकबता रहे हैं कमजोरी दूर करने में मददगार ऐसी 10 घरेलू ड्रिंक्स के बारे में।


खांसी, जकड़न और सर्दी को दूर भगाने वाला घरेलू उपचार




Benefits of Jeera (Cumin) | जीरा खाने का स्‍वास्‍थ्‍य लाभ





Source - bhaskar

सोमवार, 26 सितंबर 2016

नवरात्रि क्या है?

नवरात्र या नवरात्रि?

संस्कृत व्याकरण के अनुसार 'नवरात्रि' कहना त्रुटिपूर्ण है। 9 रात्रियों का समाहार, समूह होने के कारण से द्वंद समास होने के कारण यह शब्द पुल्लिंग रूप 'नवरात्र' में ही शुद्ध है।



नवरात्र क्या है?

पृथ्वी द्वारा सूर्य की परिक्रमा के काल में 1 साल की 4 संधियां हैं। उनमें मार्च व सितंबर माह में पड़ने वाली गोल संधियों में साल के 2 मुख्य नवरात्र पड़ते हैं। इस समय रोगाणु आक्रमण की सर्वाधिक आशंका होती है। ऋतु संधियों में अक्सर शारीरिक बीमारियां बढ़ती हैं अत: उस समय स्वस्थ रहने के लिए, शरीर को शुद्ध रखने के लिए और तन-मन को निर्मल और पूर्णत: स्वस्थ रखने के लिए की जाने वाली प्रक्रिया का नाम 'नवरात्र' है।

नौ दिन या रात

अमावस्या की रात से अष्टमी तक या प्रतिपदा से नवमी की दोपहर तक व्रत-नियम चलने से नौ रात यानी 'नवरात्र' नाम सार्थक है। यहां रात गिनते हैं इसलिए नवरात्र यानी नौ रातों का समूह कहा जाता है। रूपक द्वारा हमारे शरीर को 9 मुख्य द्वारों वाला कहा गया है। इसके भीतर निवास करने वाली जीवनी शक्ति का नाम ही दुर्गा देवी है।

इन मुख्य इन्द्रियों के अनुशासन, स्वच्छ्ता, तारतम्य स्थापित करने के प्रतीक रूप में शरीर तंत्र को पूरे साल के लिए सुचारु रूप से क्रियाशील रखने के लिए 9 द्वारों की शुद्धि का पर्व 9 दिन मनाया जाता है। इनको व्यक्तिगत रूप से महत्व देने के लिए 9 दिन 9 दुर्गाओं के लिए कहे जाते हैं।

शरीर को सुचारु रखने के लिए विरेचन, सफाई या शुद्धि प्रतिदिन तो हम करते ही हैं किंतु अंग-प्रत्यंगों की पूरी तरह से भीतरी सफाई करने के लिए हर 6 माह के अंतर से सफाई अभियान चलाया जाता है। सात्विक आहार के व्रत का पालन करने से शरीर की शुद्धि, साफ-सुथरे शरीर में शुद्ध बुद्धि, उत्तम विचारों से ही उत्तम कर्म, कर्मों से सच्चरित्रता और क्रमश: मन शुद्ध होता है। स्वच्छ मन-मंदिर में ही तो ईश्वर की शक्ति का स्थायी निवास होता है।

 जानिए नवरात्र का वैज्ञानिक-आध्यात्मिक रहस्य

भारत के प्राचीन ऋषि-मुनियों ने रात्रि को दिन की अपेक्षा अधिक महत्व दिया है इसलिए दीपावली, होलिका, शिवरात्रि और नवरात्र आदि उत्सवों को रात में ही मनाने की परंपरा है। यदि रात्रि का कोई विशेष रहस्य न होता तो ऐसे उत्सवों को 'रात्रि' न कहकर 'दिन' ही कहा जाता लेकिन नवरात्र के दिन, 'नवदिन' नहीं कहे जाते।

मनीषियों ने वर्ष में 2 बार नवरात्रों का विधान बनाया है। विक्रम संवत के पहले दिन अर्थात चैत्र मास शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा (पहली तिथि) से 9 दिन अर्थात नवमी तक और इसी प्रकार ठीक 6 मास बाद आश्विन मास शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से महानवमी अर्थात विजयादशमी के 1 दिन पूर्व तक। परंतु सिद्धि और साधना की दृष्टि से शारदीय नवरात्रों को ज्यादा महत्वपूर्ण माना गया है।

इन नवरात्रों में लोग अपनी आध्यात्मिक और मानसिक शक्ति संचय करने के लिए अनेक प्रकार के व्रत, संयम, नियम, यज्ञ, भजन, पूजन, योग-साधना आदि करते हैं। कुछ साधक इन रात्रियों में पूरी रात पद्मासन या सिद्धासन में बैठकर आंतरिक त्राटक या बीज मंत्रों के जाप द्वारा विशेष सिद्धियां प्राप्त करने का प्रयास करते हैं।

नवरात्रों में शक्ति की 51 पीठों पर भक्तों का समुदाय बड़े उत्साह से शक्ति की उपासना के लिए एकत्रित होता है। जो उपासक इन शक्तिपीठों पर नहीं पहुंच पाते, वे अपने निवास स्थल पर ही शक्ति का आह्वान करते हैं।

आजकल अधिकांश उपासक शक्ति पूजा रात्रि में नहीं, पुरोहित को दिन में ही बुलाकर संपन्न करा देते हैं। सामान्य भक्त ही नहीं, पंडित और साधु-महात्मा भी अब नवरात्रों में पूरी रात जागना नहीं चाहते और न ही कोई आलस्य को त्यागना चाहता है। बहुत कम उपासक आलस्य को त्यागकर आत्मशक्ति, मानसिक शक्ति और यौगिक शक्ति की प्राप्ति के लिए रात्रि के समय का उपयोग करते देखे जाते हैं।

मनीषियों ने नवरात्रि के महत्व को अत्यंत सूक्ष्मता के साथ वैज्ञानिक परिप्रेक्ष्य में समझने और समझाने का प्रयत्न किया। रात्रि में प्रकृति के बहुत सारे अवरोध खत्म हो जाते हैं। आधुनिक विज्ञान भी इस बात से सहमत है। हमारे ऋषि-मुनि आज से कितने ही हजारों वर्ष पूर्व ही प्रकृति के इन वैज्ञानिक रहस्यों को जान चुके थे।

दिन में आवाज दी जाए तो वह दूर तक नहीं जाएगी किंतु रात्रि को आवाज दी जाए तो वह बहुत दूर तक जाती है। इसके पीछे दिन के कोलाहल के अलावा एक वैज्ञानिक तथ्य यह भी है कि दिन में सूर्य की किरणें आवाज की तरंगों और रेडियो तरंगों को आगे बढ़ने से रोक देती हैं। रेडियो इस बात का जीता-जागता उदाहरण है। कम शक्ति के रेडियो स्टेशनों को दिन में पकड़ना अर्थात सुनना मुश्किल होता है, जबकि सूर्यास्त के बाद छोटे से छोटा रेडियो स्टेशन भी आसानी से सुना जा सकता है।

वैज्ञानिक सिद्धांत यह है कि सूर्य की किरणें दिन के समय रेडियो तरंगों को जिस प्रकार रोकती हैं, उसी प्रकार मंत्र जाप की विचार तरंगों में भी दिन के समय रुकावट पड़ती है इसीलिए ऋषि-मुनियों ने रात्रि का महत्व दिन की अपेक्षा बहुत अधिक बताया है। मंदिरों में घंटे और शंख की आवाज के कंपन से दूर-दूर तक वातावरण कीटाणुओं से रहित हो जाता है। यह रात्रि का वैज्ञानिक रहस्य है। जो इस वैज्ञानिक तथ्य को ध्यान में रखते हुए रात्रियों में संकल्प और उच्च अवधारणा के साथ अपने शक्तिशाली विचार तरंगों को वायुमंडल में भेजते हैं, उनकी कार्यसिद्धि अर्थात मनोकामना सिद्धि, उनके शुभ संकल्प के अनुसार उचित समय और ठीक विधि के अनुसार करने पर अवश्य होती है।

Source-webdunia

गुरुवार, 8 सितंबर 2016

हल्दी से बैक्टीरिया फ्री होंगी सब्जियां


सब्जियों और फलों को बैक्टीरिया अौर पेस्टीसाइड्स फ्री करने के लिए सिर्फ पानी से धो लेना ही काफी नहीं होता। हम बता रहे हैं यहां 4 उपाय ...

1. हल्दी करेगी बैक्टीरिया दूर

हल्दी में एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं। इसलिए सब्जियों और फलों को बैक्टीरिया फ्री करने में हल्दी का उपयोग करें। एक बाउल में सब्जियों या फलों की मात्रा के हिसाब से पानी लें और उसे गर्म कर लें। इसमें पांच छोटे चम्मच हल्दी मिक्स करें। अब पांच मिनट के लिए सब्जियों और फलों को इसमें डालकर रखें। इसके बाद साफ पानी से धो लें।

2. सफेद सिरके से साफ करें फल-सब्जियां

सिरके से सभी तरह के कीटाणु और कीटनाशक (पेस्टीसाइड्स) साफ किए जा सकते हैं। इसके लिए एक बाउल में पानी और एक कप सफेद सिरका डालें। इस पानी से सब्जियों को धोकर साफ करें।

3. बेकिंग सोडे का यूज करें

एक बाउल में पांच गिलास पानी भरें। इसमें चार चम्मच बेकिंग सोडा मिलाएं और फल, सब्जियों को डुबो दें। कुछ देर बाद बाउल से निकालें और यूज करें।

4. सेंधा नमक मिले पानी से धोएं फल-सब्जियां

सेंधा नमक को पानी में मिलाकर प्रयोग करने से भी पेस्टीसाइड्स दूर होते हैं। साफ पानी के बाउल में एक कप नमक मिला लें। फिर इसमें फल व सब्जियों को डालकर दस मिनट के लिए भिगो दें। कुछ देर बाद इन्हें निकालकर साफ पानी से धोएं और यूज करें।


चाय की पत्ती से सफाई होगी आसान

घर में बची हुई चाय की पत्ती, इमली का पानी और केले के छिलकों से किस तरह हो सकती है सफाई, जानिए..... 

1. चाय की पत्ती से सफाई होगी आसान चाय बनाने के बाद बची हुई चाय की पत्ती को एक बार फिर से पानी डालकर उबालें। पानी को ठंडा करके छान लें।इससे गिलास और मिरर की सफाई करें और मनचाही चमक पाएं।

2. इमली के पानी से साफ होंगे बर्तन किचन सिंक की सफाई के लिए इमली के पानी में नमक मिलाएं और साफ करें। नल की टोंटियों को साफ  करने के लिए नमक और इमली का पानी इस्तेमाल कर सकते हैं। इस पानी का उपयोग चांदी के बर्तनों को साफ करने में भी किया जाता है।इससे बर्तन चमक उठेंगे।

3. केले के छिलकों से ऐसे चमकाएं जूते अगर घर में शु पॉलिश खत्म हो गई है तो अपने जूतों पर केले के छिलकों को रब कर लें और सूखे कपड़े से पोंछ लें। इससे आपके जूते चमक जाएंगे।

बुधवार, 31 अगस्त 2016

किचन के कचरे से चमकेगा चेहरा ?

किचन की ऐसी बहुत सी चीजें होती है जो एक बार प्रयोग के बाद बेकार हो जाती है। जैसे नींबू का छिलका, आटे का चोकर आदि। लेकिन थोड़ी सी समझदारी दिखाई जाए तो इनसे चेहरे को निखारा जा सकता है। जानिए कैसे?



चाय के लिए जिन टी बैग्स का प्रयोग होता है वो चाय खत्म होने के बाद बेकार हो जाते हैं और उसे फेंक दिया जाता है। लेकिन इन्हें नही फेंकना चाहिए। नींद ना पूरी होने से आंखों की सूजन और जलन को कम करने के लिए इन टी बैग्स को आंखों पर रखें। इससे आंखों के नीचे के काले घेरे भी खत्म होते हैं।



नींबू के प्रयोग के बाद छिलके को ना फेंके। इससे काली हुई कोहनियों, घुटनों या फिर बगलों को साफ कर सकते हैं। छिलके को कोहनियों पर रगड़े, टैनिंग कम होगी और कालापन भी दूर होगा।



संतरे के छिलके को फेंकने के बजाय उसे अच्छे से सुखा लें और पीस लें। इसका पाउडर बनाकर शहद और हल्दी के साथ फेसपैक में मिलाएं और चेहरे पर लगाएं, ट्रेनिंग दूर होगी।


फ्रीज में ना रखे गूंथा हुआ आटा


चेहरे की पिगमेंटेशन को कम करने के लिए पपीते के छिलके को रगड़ें।


आटा छानने के बाद बचा चोकर सबसे बेहतरीन स्क्रब के तौर पर काम करता है। नहाते समय चोकर में दो चम्मच दूध और नींबू की कुछ बूंदें डालें और इसे चेहरे और शरीर पर लगाएं। ब्लैकहैड्स दूर होंगे और ये बॉडी स्क्रब की तरह काम करेगा।


अंडे के सफेद भाग के बच जाने पर उसे उंगलियों से चेहरे पर लगाएं। सूखने पर धो दें, ये त्वचा को मुलायम बनाता है।

Source - amarujala

सोमवार, 29 अगस्त 2016

राष्ट्रीय खेल दिवस पर निबंध | National Sports Day Essay In Hindi


National Sports Day Essay In Hindi हमारे देश भारत में हर साल 29 अगस्त को राष्ट्रीय खेल दिवस मनाया जाता हैं. राष्ट्रीय खेल दिवस 29 अगस्त को मनाने का कारण यह हैं कि इस दिन हमारे देश के दिग्गज हॉकी प्लेयर मेजर ध्यानचंद का जन्मदिन आता हैं. मेजर ध्यानचंद ने हमारे देश का नाम खेल में अपने उत्तम प्रदर्शन द्वारा बहुत ऊँचा किया हैं, इसीलिए उनके जन्मदिवस को ही राष्ट्रीय खेल दिवस के रूप में मनाया जाता हैं.


राष्ट्रीय खेल दिवस पर निबंध

National Sports Day Essay In Hindi

राष्ट्रीय खेल दिवस मनाने की दिनांक प्रति वर्ष 29 अगस्त को
राष्ट्रीय खेल दिवस मनाया जाता हैं मेजर ध्यानचंद के जन्मदिवस के उपलक्ष्य में
खेल के क्षेत्र में दिया जाने वाला सर्वोच्च सम्मान ध्यानचंद अवार्ड
अन्य सम्मान
  • राष्ट्रीय खेल पुरस्कार [नेशनल स्पोर्ट्स अवार्ड],
  • अर्जुन अवार्ड,
  • राजीव गाँधी खेल रत्न अवार्ड,
  • द्रोणाचार्य अवार्ड और
  • अन्य पुरस्कार.
राष्ट्रीय खेल दिवस सभी विद्यालयों, कॉलेज, अन्य शिक्षण संस्थाओं और खेल अकादमियों में मनाया जाता हैं और हमारी जिंदगी में खेल-कूद के महत्व को दर्शाया जाता हैं. इसके साथ ही यह दिन मनाने के पीछे एक उद्देश्य यह भी हैं कि हम अपने देश के युवाओं में खेल को अपना करियर बनाने के लिए प्रोत्साहित कर पायें और उनके अंदर ये भावना उत्पन्न कर पायें, कि वे अपने खेल के उम्दा प्रदर्शन के द्वारा खुद की तरक्की तो कर ही सकते हैं, साथ ही साथ उनके अच्छे खेल प्रदर्शन से देश का नाम भी वे ऊँचा करेंगे और राष्ट्रीय गौरव भी बढाएँगे.


मेजर ध्यानचंद के बारे में [About Major Dhyanchand] -:
मेजर ध्यानचंद वह शख्सियत हैं, जिनके जन्मदिन पर राष्ट्रीय खेल दिवस मनाया जाता हैं और मेजर ध्यानचंद का जन्म हुआ था 29 अगस्त, 1905 को. उनका जन्म हमारे देश भारत के इलाहबाद शहर में हुआ था और इस दिन हमें और हमारे देश को महान हॉकी खिलाड़ी मिला. उनमें अपने खेल हॉकी के प्रति अद्वितीय क्षमताएं थी. अगर ये कहा जायें कि उन्होंने अपने खेल के द्वारा देश में हॉकी नामक खेल को एक अलग और खास मुक़ाम दिलाया तो यह कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी. मेजर ध्यानचंद अपनी हॉकी स्टिक के साथ खेल के मैदान में जैसे कोई जादू करते थे और खेल जीता देते थे, इसलिए उन्हें “हॉकी विज़ार्ड [Hockey Wizard]” का टाइटल भी दिया गया था. उन्होंने अपने अंतर्राष्ट्रीय करियर की शुरुआत सन 1926 में की और उनकी कप्तानी के समय देश को 3 ओलिंपिक गोल्ड मैडल जिताने में मदद की. ये गोल्ड मैडल उन्होंने सन 1928, सन 1932 और सन 1936 में देश को जिताये थे.
यह एक जग जाहिर बात हैं कि जिस समय मेजर ध्यानचंद भारत के लिए हॉकी खेला करते थे, वह समय भारतीय हॉकी प्रदर्शन का और सभी राष्ट्रीय भारतीय खेलों [इंडियन नेशनल स्पोर्ट्स] का भी स्वर्ण युग [Golden Period] था. इस महान खिलाड़ी ने अपने खेल में सन 1948 तक अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया, इस समय उनकी आयु 42 वर्ष थी. इसके बाद उन्होंने हॉकी से सन्यास धारण किया था अर्थात् वे रिटायर हो गये. मेजर ध्यानचंद चाहे खेल के मैदान में हो अथवा बाहर, वे हमेशा एक अच्छे इंसान रहें. उन्हें भारत सरकार द्वारा पद्म भूषण सम्मान से सम्मानित किया गया हैं, जो कि हमारे देश का तीसरा सबसे बड़ा सिविलियन अवार्ड हैं, भारत के राष्ट्रीय अवार्ड के बारे में जानने के लिए पढ़े. इसी के साथ वे ऐसे पहले और अब तक के अकेले ऐसे हॉकी प्लेयर बने, जिसे यह अवार्ड प्राप्त हुआ हैं. सन 1979 में मेजर ध्यानचंद की मृत्यु के बाद भारतीय डाक विभाग [इंडियन पोस्टल सर्विसेस] ने उनके सम्मान में स्टाम्प भी जारी किये थे. दिल्ली के राष्ट्रीय स्टेडियम का नाम भी बदल कर, उनके नाम पर रखा गया, और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गयी. ध्यानचंद के जीवन को विस्तार से यहाँ पढ़ें|
राष्ट्रीय खेल दिवस का आयोजन [Celebration of National Sports Day] -:
विभिन्न विद्यालयों द्वारा अपना वार्षिक खेल दिवस [एनुअल स्पोर्ट्स डे] भी राष्ट्रीय खेल दिवस के साथ ही मनाया जाता हैं अर्थात् 29 अगस्त को. विद्यालाओं द्वारा इस प्रकार समान दिन कार्यक्रमों के आयोजन का उद्देश्य यह हैं कि वे आने वाली युवा पीढ़ी को खेल का महत्व बता सकें और इस क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर सकें ताकि हमारे देश को एक अच्छा खिलाड़ी प्राप्त हो. इस दिन विद्यालयों में भारत के लिए खेलने वाले अच्छे खिलाड़ियों के संपूर्ण संघर्ष और सफलता के बारे में बताया जाता हैं और उनकी तरह कामयाबी पाने के लिए राह भी दिखाई जाती हैं. इस दिन बहुत से विद्यालय पुरस्कार वितरण समारोह [प्राइज डिस्ट्रीब्यूशन फंक्शन] भी आयोजित करते हैं. इस प्रकार के आयोजन देश के पंजाब और चंडीगढ़ जैसे क्षेत्रों में होना बहुत ही आम बात हैं.
राष्ट्रीय खेल दिवस को राष्ट्रीय स्तर पर भी बड़े तौर पर मनाया जाता हैं. इसका आयोजन प्रति वर्ष राष्ट्रपति भवन में किया जाता हैं और देश के राष्ट्रपति स्वयं देश के उन खिलाड़ियों को राष्ट्रीय खेल पुरस्कार [नेशनल स्पोर्ट्स अवार्ड] देते हैं, जिन्होंने अपने खेल के उत्तम प्रदर्शन द्वारा पूरे विश्व में तिरंगे का मान बढ़ा दिया. नेशनल स्पोर्ट्स अवार्ड के अंतर्गत अर्जुन अवार्ड, राजीव गाँधी खेल रत्न अवार्ड और द्रोणाचार्य अवार्ड, जैसे कई पुरस्कार देकर उन खिलाडियों को सम्मानित किया जाता हैं. इन सभी सम्मानों के साथ “देश का सर्वोच्च खेल सम्मान – ध्यानचंद अवार्ड” भी इसी दिन दिया जाता हैं, जो कि सबसे पहले सन 2002 में दिया गया था.
इस प्रकार हमारे देश भारत में राष्ट्रीय खेल दिवस [नेशनल स्पोर्ट्स डे] बहुत ही उत्साह और हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता हैं.
Sourece - deepawali

सोमवार, 22 अगस्त 2016

रघुराम राजन की जीवनी | Raghuram Rajan Biography in Hindi

रघुराम राजन की जीवनी

Family Background and info – 3 फ़रवरी 1963 को भोपाल में राजन का जन्म एक तमिल ब्राह्मण परिवार में हुआ और इनका पूरा नाम है Raghuram Govind Rajan और इनके पिता गोविन्द राजन 1953 बैच के एक आईपीएस अफसर थे और उस एग्जाम में उन्होंने टॉप किया था | राजन अपने चार भाईयों में से तीसरे नंबर पर आते थे | राजन के पिता की 1966 में इंटेलिजेंस ब्यूरो के तरह इंडोनेशिया में पोस्टिंग थी और उसके बाद उन्हें कई जगह भेजा गया जिनमे से आखिर में उनकी जर्मनी पोस्टिंग थी जन्हा पर राजन समेत भाइयों में शुरुआती शिक्षा के तौर पर फ्रेंच स्कूल में पढाई की और बाद में पूरा परिवार 1974 में भारत लौट गया |
Education – 1974 में भारत लौटने के बाद राजन ने दिल्ली के  Delhi Public School, RK Puram में अपनी पढाई की और उसके बाद IIT Delhi में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में डिग्री प्राप्त की | कॉलेज में वो एक मेधावी छात्र थे जिसकी वजह से उन्हें ग्रेजुएट होने के बाद 1985 में बेस्ट आल राउंडर छात्र के तौर पर सम्मानित किया गया | उसके बाद 1987 में उन्होंने IIM अहमदाबाद से बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन में डिग्री हासिल की और वंहा भी वह गोल्ड मेडलिस्ट ही थे | इसके बाद उन्होंने टाटा को बतौर ट्रेनी के तौर पर ज्वाइन किया लेकिन कुछ ही महीनो बाद वो MIT Sloan School of Management चले गये जन्हा उन्होंने मैनेजमेंट में डोक्ट्रल प्रोग्राम में एडमिशन लिया और पीएचडी प्राप्त की | उन्हें पसंद और शोध के विषय banking, corporate finance, and economic development रहे है |
Career –  Raghuram Rajan के करियर की बात करें तो उन्हें हम एक बेहद योग्य अर्थशास्त्री कह सकते है क्योंकि उन्हें इस क्षेत्र का बहुत सालों का अनुभव रहा है और रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया के गवर्नर के तौर पर उन्होंने 4 सितम्बर 2013 को उस समय के गवर्नर डी सुब्बाराव सेवानिवृत्ति  के बाद उन्होंने यह पद ग्रहण किया और इस से पहले वो प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के मुख्य आर्थिक सलाहकार भी रह चुके है | Raghuram Rajan 2003 से 2006 तक अंतराष्ट्रीय मुद्रा कोष के मुख्य अर्थशास्त्री और अनुसन्धान निदेशक भी रह चुके है | साथ ही उन्होंने भारत के योजना आयोग द्वारा भारत में वित्तीय सुधार के लिए गठित की गयी कमेटी को लीड करने वाले सदस्य भी रह चुके है यह नवम्बर 2008 का समय था  | इसलिए हम कह सकते है कि आर्थिक जगत में Raghuram Rajan एक जाना पहचाना नाम है | American Finance Association के प्रेसिडेंट के तौर पर भी राजन में 2011 में काम किया है |
Personal Life – राजन की निजी जिन्दगी की बात करें तो उन्होंने  Radhika Puri Rajan से शादी की जिन्हें वो आईआईएम अहमदाबाद में अपनी पढाई के दौरान मिले थे | राधिका अब  University of Chicago Law School में पढ़ाती है | राजन के एक बेटा और एक बेटी है | उनके बड़े भाई अमेरिका एक एक सोलर कम्पनी में काम करते है और उनकी बहन की शादी एक आईएस ऑफिसर से हुई है और वो दिल्ली में फ्रेंच टीचर है |
Interesting facts about Raghuram Rajan – आप रघुराम राजन को चाहे कैसे भी जानते हो आप उन्हें गंभीर अर्थशास्त्री के तौर पर जानते हो या रिज़र्व बैंक के गवर्नर के तौर पर लेकिन फिर भी उनके बारे में कुछ चीजे है जो आप नहीं जानते तो चलिए इसी बारे में जानते है –
  • 1970 में उनके पिता की पोस्टिंग श्रीलंका में तो राजनीतिक उथल पुथल के चलते उन्होंने अपने एक साल के स्कूल को मिस कर दिया था |
  • राजन hindi के मामले में थोड़े कम है क्योंकि उनके पिता की पोस्टिंग शुरू में देश के बाहर ही रही जिसमे इंडोनेशिया , श्रीलंका और बेल्जियम जैसे देश है जिसकी वजह से उन्होंने 7th क्लास में hindi को जानने और पढने का मौका मिला |
  • Raghuram Rajan IIT से ग्रेजुएशन में और बाद में IIM अहमदाबाद में गोल्ड मेडलिस्ट रहे है |
  • उनके छोटे भाई मुकुन्द राजन जो है टाटा ग्रुप के  Chief Ethics Officer के पद पर कार्य कर रहे है |
  • राजन ने राधिका राजन से शादी की है जिन्हें वो तब मिले जब वो IIM अहमदाबाद में पढ़ रहे थे |
  • राजन ने 2005 में एक शोधपत्र प्रस्तुत किया जिसमे आने वाले समय और उस समय के चल रहे वित्तीय जोखिम और तरीके पर चिंता जताई गयी थी लेकिन उस समय उनके इस शोधपत्र को नकारात्मक लिया गया लेकिन बाद में 2008 में आई वैश्विक मंदी ने उन्हें सही साबित कर दिया |
  • 2003 में उन्हें ब्लेक फिशर अवार्ड से नवाजा गया जो उन्हें मिलता है जिनका वितीय सेक्टर में प्रभावी योगदान हो और जो 40 की उम्र से कम हो |
  • राजन खेल के मामले में Tennis and Squash दोनों में बेहतर है | साथ ही उन्हें स्विमिंग का बेहद शौक है |
  • राजन हिंदी में थोड़े कमजोर है लेकिन तमिल और इंग्लिश पर उनकी शानदार पकड़ है | फ्रेंच भी उन्हें थोड़ी बहुत आती है |
  • राजन को सुडोकु और क्विज जैसी चीजे बेहद पसंद है |
  • राजन शराब और स्मोक नहीं करते है साथ ही वो शुद्ध शाकाहारी है |
  • उनका मासिक वेतन करीब 1,98,700 रूपये है |
  • उनका कार्यकाल सितम्बर 2016 में ख़त्म हो रहा है और हाल फ़िलहाल उन्होंने कहा है वो आगे के कार्यकाल को बढाने के पक्ष में नहीं है  और वापिस जाना चाहते है हालाँकि देश को उनकी जब भी जरुरत रहेगी वो उपलब्ध रहेंगे |
  • एक इंटरव्यू में यह सामने आया जब उनकी माँ ने उनके बारे में कुछ राज कहे उनके अनुसार राजन इतने धार्मिक नहीं है और कम ही मंदिर में जाते है | उन्होंने कहा “ और इसकी जरुरत भी नहीं है क्योंकि जो आदमी अच्छा है भगवान् हमेशा उसके साथ ही होते है |”
  • raghuram rajan ने अपने कार्यकाल में NPA (Non-performing asset) को लेकर भी काफी सकारामक काम किये है | साथ ही ऑनलाइन फ्रॉड आदि के बारे में भी समय समय पर चिंता जताते हुए इन्होने बैंकिंग सिस्टम के सुधार पर काफी जोर दिया है |
रघुराम राजन विवाद – असल में राजन के अपने दूसरे कार्यकाल को बढाने की इच्छा के पीछे यह विवाद है जो सुब्रमण्यम स्वामी के ब्यान और प्रधानमंत्री को उनकी भेजी गयी चिट्टी की वजह से उपजा है जिसमे उन्होंने Raghuram Rajan पर आरोप लगाते हुए यह कहा कि “ Raghuram Rajan मानसिक तौर पर पूरी तरह ठीक नहीं है और उन्होंने जानबूझकर भारतीय अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुँचाया है | “ उन्होंने कई तरह के और भी इल्जाम Raghuram Rajan पर लगाये है और उन्हें तत्काल पद से हटाने की भी मांग कर डाली | हालाँकि राजन अपनी यूनिवर्सिटी की दुनिया से तीन साल की छुट्टी पर है और इंटरव्यू के दौरान उन्होंने यह बताया कि वो भी अब दूसरे कार्यकाल के लिए इच्छुक नहीं है और अपनी उसी दुनिया में वापिस जाना चाहते है | उनके जानकारों और समर्थन करने वालों के हिसाब से राजन को जिस तरह से ट्रीट किया गया वो ठीक नहीं है और ना ही सरकार ने उनके पक्ष में कुछ ऐसा किया जिस से विवाद कम होता इसलिए उनका यही फैसला ठीक है |
Sourece - hindibiography