मंगलवार, 13 नवंबर 2018

सूक्तो बंगाल की एक बहुत ही फेमस डिश

 सूक्तो एक बहुत ही टेस्‍टी और पारंपरिक बंगाली डिश है जिसमें एक चुटकी शक्‍कर के साथ ढेर सारी सब्‍जियां और एक कसीली सब्‍ज़ी जैसे की करेला मिलाया जाता है
बंगाली खाना तो जैसे सूक्‍तो के बिना बिल्‍कुल अधूरा ही है। अगर आप भी बंगाल के खाने से इम्प्रेस है और आप कुछ वेजिटेरियन बनाना चाहती हैं तो फिर सूक्‍तो को कभी भी ना भूलें आइये पढ़ते हैं इसे बनाने की एकदम सरल व  आसान विधि।

आवश्यक सामग्री 

  • करेला = 100 ग्राम, कटा हुआ
  • आलू = एक अदद, उबला और कटा हुआ
  • बैंगन = एक अदद, स्‍लाइस किया हुआ
  • मूली = एक अदद, स्‍लाइस की हुई
  • कच्‍चा केला = एक अदद कटा हुआ
  • सेम = 50 ग्राम
  • सहजन = 50 ग्राम, लंबे टुकड़ों में कटा हुआ
  • पंच फोरन = आधा चम्मच
  • सरसों = आधा चम्मच
  • सरसों के बीज का पेस्ट = दो बड़े चम्मच
  • घी/मक्खन = एक बड़ा चम्मच
  • तेल = 9 बड़े चम्मच
  • उरद के दाल वाली मसाले वाली बड़ी = 50 ग्राम
  • सूखी लाल मिर्च = एक टुकड़ा
  • तेज़ पत्‍ता = एक टुकड़ा
  • नमक = स्वादअनुसार
  • चीनी = आधा चम्मच
  • हल्दी पाउडर = आधा चम्मच
  • अदरक का पेस्ट = एक बड़ा चम्मच

विधि

एक कढ़ाई में 4 चम्‍मच तेल गर्म करें। फिर उसमें बड़ियां डाल कर गोल्‍डन होने तक फ्राई कर लें। अब बड़ियों को निकाल कर एक प्‍लेट में रख दें। फिर कढ़ाई में और तेल मिलाएं। और उसके बाद करेला डाल कर फ्राई करें और जब वह ब्राउन हो जाए, तब उसे निकाल लें।
फिर एक-एक कर के कढाई में मूली, बैंगन, बींस, सेम, केला, आलू और सहजन डालें। और 3 मिनट तक चलाते हुए तल लें।
ऊपर से शक्‍कर, हल्‍दी, नमक और अदरक पेस्‍ट डालें और दो मिनट तक पकाएं। इसके बाद इसमें 4 कप पानी डाल कर 5 मिनट तक पकाएं। और इसके बाद कढाई को उतार दें और दूसरी कढाई या फिर पैन चढा कर उसमें एक चम्‍मच तेल या घी डालें।
अब तेज़ पत्‍ता, सूखी लाल मिर्च, पंच फोरन, राई डाल कर पकाएं। फिर इसमें सरसों का पेस्‍ट और फ्राई की हुई बडियां और करेले मिलाएं। और इन सब को सब्‍ज़ी की कढाई में मिला कर तब तक पकाएं जब तक कि यह गाढी ना हो जाए। फिर इसे गैस से उतारें और गरमागर्म चावल के साथ सर्व करें या खाएं

गुरुवार, 8 नवंबर 2018

जीवन में संयम और अनुशासन के महत्व को दर्शाने वाला अनूठा प्रयोग

जीवन में संयम और अनुशासन के महत्व को दर्शाने वाला अनूठा प्रयोग

1972 में विकासात्मक मनोवैज्ञानिक वॉल्टर मिशेल ने बिना किसी सोच-विचार या प्रेरणा के अचानक ही एक ऐसा अनूठा प्रयोग किया जो मनोविज्ञान के क्षेत्र में पिछली शताब्दी का सबसे प्रसिद्ध प्रयोग बन गया.
मिशेल ने पांच से दस वर्ष की अवस्था के कई बच्चों को एक कमरे में एकत्र किया और उन सभी को एक-एक चॉकलेट दी. फिर उन्होंने उन बच्चों से कहा कि वे थोड़ी देर के लिए बाहर जा रहे हैं लेकिन उनके वापस आने तक जो बच्चा चॉकलेट नहीं खाएगा उसे वे लौटकर दो चॉकलेटें और देंगे.
कमरे के बाहर जाने के बाद उन्होंने छुप कर उन बच्चों की हरकतों का जायजा लिया. वे यह जानना चाहते थे कि क्या वे बच्चे और अधिक बड़े पुरस्कार के लिए अपने लालच पर नियंत्रण रख सकेंगे या वे अपने लालच के वशीभूत होकर किसी व्यक्ति द्वारा निगरानी नहीं किए जाने पर अपनी चॉकलेट खा लेंगे?
मिशेल ने यह देखा कि उस समूह के लगभग एक तिहाई बच्चों ने उनके कमरे से बाहर जाते ही फौरन अपनी चॉकलेट खा ली. दूसरे एक तिहाई बच्चों ने कुछ समय तक मिशेल के वापस आने का इंतजार किया लेकिन वे अपने लालच पर नियंत्रण नहीं रख सके और उन्होंने भी अपनी चॉकलेट खा ली. बाकी बचे रह गए लगभग एक तिहाई बच्चों ने पूरे 15 मिनट तक मिशेल के लौटने की प्रतीक्षा की. निस्संदेह उन छोटे बच्चों के लिए तो ये 15 मिनट अनंतकाल जितने लंबे थे क्योंकि चॉकलेट उनके हाथ में थी या उनके सामने रखी हुई थी फिर भी वे उसे खाने के लोभ पर काबू कर पाए.
उस दौर में मनोवैज्ञानिकों का यह मानना था कि संकल्प शक्ति प्रत्येक व्यक्ति में जन्मजात होती है और इसमें जीवन भर कोई परिवर्तन नहीं होता. लेकिन इस मामले ने यह साबित कर दिया कि संकल्प शक्ति किसी परिस्थिति या परीक्षण का परिणाम भी हो सकती है. इस प्रयोग के द्वारा मिशेल बच्चों की उम्र और संकल्प शक्ति के बीच का संबंध भी जांचना चाहते थे. वे यह जानना चाहते थे कि क्या अधिक उम्र के बच्चे अपने लालच पर नियंत्रण अधिक कुशलता से रख सकते हैं?
एक प्रकार से यह प्रयोग विकासात्मक मनोविज्ञान का अध्ययन था. यह उनके व्यक्तित्व का आकलन नहीं था, लेकिन इस प्रयोग ने यह दर्शा दिया कि जो बच्चे उम्र में अपेक्षाकृत बड़े थे वे अधिक देर तक अपने लोभ पर नियंत्रण रखने में सफल हो सके. मिशेल की यह रिसर्च अनेक जर्नलों में प्रकाशित हुई लेकिन समय के साथ लोगों ने इसे भुला. दिया इस प्रयोग के बाद मिशेल और बच्चे भी अपनी-अपनी राह पर चले गए. चॉकलेट का यह प्रयोग सफल तो था लेकिन लोगों ने इसे एक अनूठे प्रयोग से अधिक कुछ नहीं समझा.
लेकिन इस प्रयोग के 20 साल बाद मिशेल के मन में एक नया विचार आया और उन्होंने इस प्रयोग को दोबारा नई दृष्टि से देखा. फिर उनके निष्कर्षों ने मनोवैज्ञानिक जगत को हिलाकर रख दिया.
असल में इस प्रयोग में शामिल एक बच्ची मिशेल की ही पुत्री थी जो उस दौरान 5 साल की थी. इस प्रयोग में शामिल बाकी दूसरे बच्चे भी उसके ही स्कूल में और कई तो उसकी ही क्लास में पढ़ते थे और उसके दोस्त थे.
जैसे-जैसे साल गुजरते गए मिशेल की पुत्री और उसके सभी दोस्त भी बड़े होते गए और मिशेल ने इस बात का अनुभव किया कि वे बच्चे जिन्होंने प्रयोग में अपने लोभ पर किसी भी प्रकार का नियंत्रण नहीं दिखाया था, वे अपनी पढ़ाई-लिखाई में पिछड़ रहे थे और उनके अंक बहुत कम आते थे. दूसरी और वे बच्चे जिन्होंने अत्यधिक संयम का प्रदर्शन किया था और जो लालच के फेर में नहीं पड़े थे वे हमेशा अपने शिक्षकों की आंख का तारा बने रहे. उन्होंने अपनी क्लास में हमेशा टॉप किया और उन्हें बहुत ही प्रसिद्ध कॉलेजों में एडमिशन मिला.
जब मिशेल ने यह देखा तो उन्होंने और अधिक गहराई से उन बच्चों की ट्रैकिंग करने का निश्चित किया और यह देखने का प्रयास किया कि वे सभी बच्चे किस प्रकार के वयस्क व्यक्तियों के रूप में पनपे. मिशेल ने जो फॉलो-अप किया उसके परिणाम इतने चमत्कारिक थे कि उनका प्रयोग अभी भी एक प्रकार से जारी है और अत्यधिक प्रसिद्ध हो चुका है.
अपने लालच पर नियंत्रण करके संयम प्रदर्शित करने की उन बच्चों की क्षमता ने उन्हें आगे जाकर अकादमिक शिक्षा में अव्वल बनाया और वे जीवन के लगभग हर क्षेत्र में सफल रहे. उन्हें सबसे अच्छी नौकरियां मिली. समाज में भी उनकी प्रतिष्ठा स्थापित हुई.
इस बीच दूसरे मनोवैज्ञानिकों ने भी इससे मिलते-जुलते प्रयोग किए और उन्होंने अपनी रिसर्च में यह पाया कि जो व्यक्ति अपने लालच पर नियंत्रण करके संयम धारण करते हैं वे दूसरों से औसतन अधिक स्वस्थ होते हैं और अकादमिक रूप से अधिक सफल होते हैं. ऐसे व्यक्तियों के जीवन का आर्थिक पक्ष प्रबल होता है और सबसे अच्छी बात तो यह है कि वे जीवन के हर पैमाने पर खरे उतरते हैं. उनकी रिलेशनशिप्स अधिक स्थाई होते हैं और ऐसे व्यक्तियों को हताशा और निराशा का कम सामना करना पड़ता है.
इस प्रयोग ने यह भी दर्शाया कि मनोवैज्ञानिक लगभग एक शताब्दी तक व्यर्थ के मसलों में उलझे रहे. वास्तव में IQ की अवधारणा की उत्पत्ति ही इस उद्देश्य से हुई थी लेकिन उसमें घोर असफलता मिली और बुद्धि को जांचने के लिए तैयार किए गए अन्य प्रयोग और उपाय भी दोषपूर्ण सिद्ध हुए. मिशेल इस मामले में बहुत सौभाग्यशाली रहे कि उनके हाथ अनायास ही एक कुंजी लग गई.
हमारी पीढ़ियां क्रमिक रूप से आत्मसम्मान को आत्मानुशासन पर वरीयता देती आई हैं. मुझे यह लगता है कि हम इस नीति की बड़ी कीमत चुका रहे हैं.
हम उस दौर में हैं जहां संकल्पशक्ति को समाज में अधिक महत्वपूर्ण नहीं समझा जाता. आप अपने आसपास उन लोगों को देखिए जिनका वजन खतरनाक स्थिति तक पहुंच चुका है और ऐसा होने का बहुत बड़ा कारण यह है कि उनका स्वयं पर नियंत्रण नहीं है. हम लोगों का फोकस दिनोंदिन कम होता जा रहा है. हम किसी भी एक चीज पर ध्यान अधिक देर तक नहीं दे पाते. लोग स्वयं को विश्व का केंद्र मानने लगे हैं. उनमें नारसीसिज़्म, एंजाइटी, और डिप्रेशन जैसे मनोविकार पहले से कहीं अधिक देखे जा रहे हैं.
किसी भी व्यक्ति के जीवन में सबसे मूल्यवान स्किल वे हैं जो आत्मानुशासन और स्वयं को स्वस्थ रखने से जुड़ी आदतों को विकसित करते हैं. यदि आप दूसरों से अधिक स्वस्थ होना चाहते हैं, अधिक सफल होना चाहते हैं, या अपने जीवन पर अधिक नियंत्रण करना चाहते हैं तो केवल आत्मानुशासन ही इस मामले में आपकी सहायता कर सकता है.
स्वयं पर कठोर नियंत्रण और किसी भी प्रलोभन के आगे नहीं झुकना ही सबसे अच्छी नीति है. आलस के मारे पांच मिनट अधिक सो लेने या स्वाद के वशीभूत होकर थोड़ी अधिक मिठाई खा लेने जैसे प्रलोभन बहुत छोटे उदाहरण हैं लेकिन जीवन पर व्यापक प्रभाव डालते हैं.
Source- hindizen

मंगलवार, 6 नवंबर 2018

General Knowledge - सामान्य ज्ञान

 सामान्य ज्ञान



ऐसा कौन सा देश हैं जो आज तक किसी का गुलाम नहीं हुआ ?
नेपाल

विश्व मैं कुल कितने देश हैं ?
195

विश्व का किस देश में कोई भी मन्दिर नही है?
साऊदी अरब
“जनरल” किस सेना का एक अधिकारी पद है?
थल सेना

किस वर्ष में महात्मा गांधी का जन्म हुआ था?
सन् 1869

 विश्व का सबसे बड़ा देश कौन सा देश है?
रूस 

पानीपत का प्रथम युद्ध किस के बीच लड़ा गया था?
बाबर और इम्ब्राहिम लोदी के बीच

शरीर के किस अंग में यूरिया बनता है?
लिवर


किस शासक ने ग्रांड ट्रक रोड का निर्माण कराया था?
शेरशाह सूरी

मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति कौन करता है?
राष्ट्रपति

 नागालैण्ड भारत का विधिवत राज्य कब बना?
 सन् 1963 ई.

रविन्द्रनाथ टैगोर ने भारत के राष्ट्रीय गान के अलावा किस एक और देश का राष्ट्रीय गान लिखा?
बांग्ला देश

Histroy of Raja Birbalji | राजा बीरबलजी का इतिहास


ऐसा कौन सा पेड़ है जिसमें लकड़ी नहीं होती ?
केले का पेड़

सबसे पुराना वाद्य यंत्र कौन-सा है ?
वीणा

भारत का सबसे पुराना संयुक्त स्टॉक बैंक कौन सा है?
इलाहाबाद बैंक

भारत का पहला मोबाइल बैंक कौन सा है?
लक्ष्मी वाहिनी बैंक (खरगोन जिला, मध्य प्रदेश)

भारत में टीवी पर पहली बार समाचार किसने पढ़े थे?
प्रतिमापुरी

ईसरो का 100 वां मिशन कौन सा था?
पी.एस.एल.वी.

सबसे पहले माउंट एवरेस्ट को किसने कैलकुलेट किया था?
राधानाथ सिकन्दर

जीवन बीमा को राष्ट्रीय कब किया गया ?
सन् 1956

विश्व का कौन सा ऐसा देश है जहाँ मच्छर नहीं पाये जाते है?
फ्रांस

 विश्व का सबसे बड़ा शहर कौन सा है?
न्यूयार्क (अमेरिका)

रावण के पिता का नाम क्या था?
विश्ववा

हिन्दुओं के कुल कितने पुराण है?
18

सूचना : अगर आपको इन प्रश्न उत्तर में कुछ गलती मिलती है तो हम उसके लिए आपसे माफ़ी मांगते है| और कृपया करके प्रशन नंबर लिखकर उसका सही उत्तर नीचे दिए गये कमेंट बॉक्स में लिखे जिससे बाकि  को सही जानकारी मिल सके.


रविवार, 4 नवंबर 2018

Tips in Hindi for staying healthy in this winter season – ठण्ड में स्वस्थ रहने के नुस्खे

ठण्ड में स्वस्थ रहने के नुस्खे





जब ठण्ड का मौसम आ जाए तो आपको ऐसे कई लोग मिलेंगे, जो लम्बे तथा पीड़ा भरे गर्मी के दिनों को अलविदा कहने में काफी ख़ुशी का अनुभव कर रहे होंगे। सर्दी के उपाय, परन्तु कई ऐसे लोग भी होंगे जो ठण्ड के आने की बात सोचते ही कांपने लगते हैं।

सर्दियों में सर्दी-जुखाम और बुखार जैसी समस्याएं बहुत लोगों के लिए नुक़सानदायक साबित होती हैं क्यूंकी वो बदलते समय और वातावरण में अपने आप को ढाल नही पाते हैं. लेकिन दोस्तों, अगर छोटी छोटी बातों का ध्यान रखा जाए तो यही सर्दियाँ एक खूबसूरत मौसम की तरह लगने लगता है. सर्दियों में किसी भी बीमारी से बचने के लिये आवश्यक है कि हम छोटी छोटी बातों का ध्यान रखें और पहले से ही बचाव का इंतजाम करना शुरु कर दें।


1.सर्दियों के करीब आते ही सबसे पहले अपना साबुन या फेसवॉश बदलें। अधिक क्रीमी तत्व वाले साबुन या फेसवॉश का इस्तेमाल करें। इनमें मौजूद मॉइस्चराइजिंग तत्व आपकी स्किन को ऊपर से नमी देकर रूखेपन से बचाएंगे।


2.सर्दियों में स्किन काफी रूखी और बेजान हो जाती है। इसके लिए जरूरी है कि विटामिन ई युक्त Mosturizer लगाया जाए। चेहरे को साफ पानी से धोएं और रोजाना रात को और दिन में 3-4 बार अच्छा mosturizer लगाएं।


3. एक स्वस्थ मस्तिष्क से ही एक स्वस्थ इंसान की कल्पना हो सकती है. इसलिए नीद पूरा होना हर इंसान की ज़रूरत है. अगर आप भरपूर नीद लेते हैं तो आपके सोचने की छमता भी बढ़ती है और आपके शरीर मेी पॉज़िटिव तरंग का संचार होता है. आप फ्री माइंड से सोचते हैं और पॉज़िटिव सोचते है. जिससे आप कभी भी डिप्रेशन depression के शिकार नही हो सकते.

4.ठंडी हवाएं चलते ही कुछ लोग गर्म पानी से सुबह नहाना शुरू कर देते हैं। लेकिन इस बात का खास ख्याल रखें कि पानी को अधिक गर्म ना करें। अधिक गर्म पानी से नहाने से त्वचा का प्राकृतिक तेल निकल जाता है और यह अधिक रूखी रहने लगती है। अगर मन हो तो गुनगुने पानी का इस्तेमाल करें।


5.सर्दियों में साबुन का प्रयोग कम से कम करें। त्वचा अगर रूखी है तो स्क्रब करना भी बंद कर दें क्योंकि इससे त्वचा पर मौजूद Pores तो खुल जाएंगे लेकिन त्वचा भी रूखी हो जाएगी। स्क्रब तभी करें अगर स्किन ऑयली है ताकि इससे स्किन का ऑयल कम हो सके।


6.सर्दियों में जोडो़ में दर्द होने की संभावना ज्यादा रहती. शरीर में अगर कोई पुरानी चोट है या हड्डियों की चोट है तो वो सर्दियों में दर्द करती है. तो जो लोग दिल, गठिया या अस्थमा रोगी हैं, उन्हें सर्दियों में पूरी सावधानी रखनी चाहिये। ठंड सेबचने के लिए ऊनी गर्म कपड़ों comfortable clothes for winter का प्रयोग करना चाहिए. और इस बात का खास ध्यान रखना चाहिए की कपड़े आरामदायक हों.


7.मॉइस्चराइजर लगाने से पहले अपने चेहरे को हल्का गीला भी कर लें। इससे मॉइस्चराइजर स्किन में लॉक हो जाएगा और लंबे समय तक इसका असर बना रहेगा।


8.सर्दियों में त्वचा को जानदार और कोमल बनाने के लिए दही और चीनी को मिक्स कर अच्छी तरह से चेहरे पर लगाएं और थोड़ी देर सूखने दें।इसके बाद हल्के हाथों से मसाज करें और फिर गुनगुने पानी से धो दें।


9.स्किन को ऊपरी देखभाल के साथ अंदरूनी रूप से रिपेयर करने की भी जरूरत होती है। इसके लिए अधिक से अधिक पानी पियें। माना कि गर्मी के कम होते ही पानी की प्यास अपने आप ही कम हो जाती है लेकिन पानी की कमी से त्वचा अन्दर से कमजोर पड़ने लगती है।


10.स्किन को कोमल और हेल्दी रखना है तो नारियल तेल का इस्तेमाल करें। नारियल का तेल सिर्फ बालों के लिए ही उपयोगी नहीं है बल्कि इससे रोजाना नहाने से एक घंटे पहले शरीर और चेहरे की मालिश करें और फिर नहाएं। स्किन कभी रूखी नहीं होगी।


11.वैवाहिक जीवन को खुशहाल बनाने के लिए सर्दियों में शक्ति वर्धक आयुर्वेदिक जड़ी बूटियां जैसे असगंध, मूसली, गोखरू, मुलहटी, शिलाजीत आदि से बने हुए औषध योग जैसे च्यवनप्राश,मूसली ,बादाम पाक ,कौंच पाक उपयोग कर सकते हैं. ये पौषक तत्व आपको अंदर से मजबूत बनाते हैं. इन तत्वों का उचित मात्रा में सेवन करना चाहिए और एक उचित diet चार्ट फॉलो करना चाहिए.


12.सर्दियों में होंठों की त्वचा का भी खास ख्याल रखें। मौसम बदलते ही होंठ फटने लगते हैं और इनका प्राकृतिक रंग खोने लगता है। इसे बनाए रखने के लिए SPF युक्त लिप बाम का इस्तेमाल करें। अगर आप लिप बाम ना लगाना चाहें तो दिन में 2 से 3 बार होंठों पर शहद लगाएं। शहद होंठों के लिए नेचुरल मॉइस्चराइजर का काम करता है।

Source-Different Sites

सोमवार, 29 अक्टूबर 2018

लाओत्से के विचार

लाओत्से के अनमोल विचार




जल की तुलना में कुछ भी अधिक नरम या लचीला नहीं है, फिर भी कोई इसे रोक नहीं सकता।



किसी के द्वारा गहराई से प्रेम किया जाना ताकत देता है, और किसी को गहराई से प्रेम करना साहस देता है।


वह मन जो स्थिर है, उसके प्रति पूर्ण ब्रह्माण्ड समर्पित हो जाता है।


लोगों को लीड करना है तो उनके पीछे चलो।


विश्व की सबसे कोमल चीज दुनिया की सबसे कठोर चीज को जीत लेती है।


हज़ारों मील की यात्रा एक कदम के साथ शुरू होती है।


मौन महान शक्ति का स्रोत है।


एक अच्छे मुसाफ़िर की कोई तय योजना नहीं होती, और वह पहुंचने पर आमादा नहीं होता।


जो संतुष्ट है, वही अमीर है।


देखभाल करने से साहस आता है।


स्वास्थ्य सबसे बड़ी संपत्ति है। संतोष सबसे बड़ा खजाना है। आत्मविश्वास सबसे बड़ा मित्र है।


प्रकृति जल्दबाजी नहीं करती, फिर भी सारी चीजें पूरी हो जाती हैं।


जीवन और मृत्यु एक ही धागा है, अलग-अलग और से देखी गयी एक ही रेखा।


दूसरों को जानना ज्ञान है, स्वयं को जानना आत्मज्ञान है।


मेरे पास सिखाने के लिए बस तीन बातें हैं: सादगी, धैर्य, दया – ये तीनो आपका सबसे बड़ा खजाना हैं।


वो जो इंसान जानता है, बोलता नहीं। और वो जो बोलता है जानता नहीं।

मंगलवार, 16 अक्टूबर 2018

जोक्स- Jokes





ज़रुरत से ज़्यादा भगवान को याद मत किया करो क्योंकि…
किसी दिन भगवान ने याद कर लिया तो.. लेने के देने पड़ जायेंगे ।

काम ऐसे करो कि लोग आपको……
किसी दूसरे काम के लिए बोलें ही नहीं

आज के जमाने में सत्संग उसी संत का बढ़िया रहता है,
जिसके पंडाल में गर्म पोहा, समोसा जलेबी और अदरक वाली चाय मिले।
वरना ज्ञान तो अब ऑनलाइन उपलब्ध है।

आज सबसे बड़ी कुर्बानी वह होती है,
जब हम अपना फोन चार्जिंग से निकाल कर किसी और का फोन लगा दें ।

आप कितने ही अच्छे काम कर लें,
लेकिन लोग उसे ही याद करते हैं, जो उधार लेकर मरा हो ।

आजकल माता-पिता को बस दो ही चिंताएं हैं…
इंटरनेट पर उनका बेटा क्या डाउनलोड कर रहा है और… बेटी क्या अपलोड कर रही है ।

जंगल में चरने गया बैल, दोस्तों के साथ पार्टी में बैठा पुरुष
और ब्यूटी पार्लर में गयी महिला.. जल्दी वापस नहीं आते ।।

जब आप किसी चीज को पूरी शिद्दत से पाने की ख्वाहिश या कोशिश करते हैं,
तो वह चीज… उसी शिद्दत से कुछ ज्यादा ही एटीट्यूड दिखाने लगती है।

इतना तो बगुला भी मछली पकड़ने के लिये चोच नहीं निकालता होगा,
जितना लड़किया आजकल सेल्फी लेने के समय होठ निकालती है.

जीवन में कम से कम एक सच्चा मित्र हमेशा अपने पास रखो ताकि…
जिस दिन आपके यहाँ तुरई, करेला या कुंदरू की सब्जी बने उस दिन उसके घर जाकर खाना खा सको…।
ज्ञान समाप्त!
------------------------------------------------------------------------------------------------------------
मारवाड़ी ने शेख को खून देकर उसकी जान बचाई
शेख ने खुश होकर उसे Mercedes कार गिफ्ट की!

शेख को फिर खून की जरूरत पड़ी,
मारवाड़ी ने फिर खून दिया

अबकी बार शेख ने सिर्फ लड्डू दिए,
मारवाड़ी (गुस्से से): इस बार सिर्फ लड्डू??

शेख: भाई, अब हमारे अंदर भी मारवाड़ी का खून दौड़ रहा है
------------------------------------------------------------------------------------------------------------
हेडमास्टर फोटो ग्राफरसे:- 20 रुपये बहुत होते है| स्कूल मे 1600 बच्चे है 10-10 रुपये मे फोटो निकालो.

हेडमास्टर अहिस्टंट से:- फोटो के लिये सभी बच्चोंसे 30-30 रुपये निकालो.

टीचर क्लास में:
सुनो बच्चो कल तुम लोगो का फोटो शूट होगा …
सब लोग अपने अपने घर से Rs.50/- ले कर आना

शरारती बच्चा :
ये सब टीचर लोगो की मिली भगत होती है…
एक फोटो के 20/- रूपये लगते है और हम लोगो से
50_50 रूपये लिए जा रहे है.

फिर हमारे पैसो से ये सब स्टाफ रूम में
बैठ के समोसा खाएंगे और हम बच्चों को मिलेगा ठेंगा.
भलाई का तो ज़माना ही नहीं रह गया ,, . .

At home-
शरारती बच्चा :
मम्मी कल स्कूल में ग्रुप फोटो शूट होना है
टीचर ने Rs.100/- रूपये मंगाए है .. . .

माँ : 100 rs!!
खुली लूट मचा रखी है इन लोगो ने ..
फिर हमारे पैसो से ये सब ऐश करेंगे.

रुक बेटा में तेरे पप्पा से मांगती हु …

मम्मी पापा से : अरे सुनते हो बच्चे के स्कूल में फोटो के लिए Rs.200 मांगे है !!”

ये इण्डिया है भाई हर जगह लूट मची है!




शनिवार, 29 सितंबर 2018

Khopra Patties - खोपरा पेटिस

 खोपरा पेटिस

इंदौर अपने खान-पान के लिए पूरे देश में फेमस है. इंदौर शहर अपने लजीज व्यंजनों के लिए काफी चर्चा में रहता है। इंदौर की फूड स्ट्रीट शाम होते ही खाने के शौकीनों से भर जाती हैं। सिर्फ शहर भर से ही नहीं बल्कि यहां के व्यंजनों को चखने के दूर-दूर से से लोग आते हैं।

वहीं का एक और जायका हम पेश कर रहे हैं जिसका नाम है खोपरा पेटिस.

खोपरा पेटिस बनाने की सामग्री

2 आलू उबले हुए
5 बड़ा चम्मच खोपरा/ नारियल का बुरादा
2 छोटा चम्मच नींबू का रस
5 हरी मिर्च, कटी हुई
5-6 काजू, कटे हुए
5-6 किशमिश
2 बड़े चम्मच कोर्नफ्लोर(मक्के का आटा सफेद वाला)स्वादानुसार नमक
एक छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर
2 छोटा चम्मच धनिया पत्ती, बारीक कटी हुई
तलने के लिए तेल

खोपरा पेटिस बनाने की विधि
भरावन कि सारी सामग्री को एकत्र कर के अच्छे से मिलाये

मसले आलूओ में कोर्नफ्लोर, नमक व सफेद मिर्च पाउडर मिलाये 

इसे अच्छे से गूँथ ले व 8 भागों में बाँटे।

अब एक दूसरे बाउल में नारियल का बुरादा, हरा धनिया, लाल मिर्च पाउडर, हरी मिर्च और नींबू का रस डालकर अच्छी तरह मिला लें.

एक भाग लेकर उसका गोला बनाये व थोड़ा चपटा कर उसमें १ छोटा चम्मच भरावन मिश्रण भरें ।

चारों तरफ से गोले को उठाकर अच्छे से बंद करें(ताकि तलते समय पेटिस टूट कर उसमें से भरावन बाहर ना आए।) व पुनः गोलाकार दे।आप चाहें तो इन्हें चपटा कर लें या फिर लड्डू के आकार में ही रहने दें.

अब एक पैन में तेल गर्म होने के लिए रखें.

इन पेटिस को गर्म तेल में मध्यम आँच पर सुनहरा भूरा कुरकुरा होने तक तले।

पेटिस को किचन पेपर पर निकालें ताकि इनका अतिरक्त तेल निकल जाए.

गर्मागर्म पेटिस को हरी और लाल चटनी के साथ सर्व करें.




शुक्रवार, 24 अगस्त 2018

जन आरोग्य अभियान-Jan Arogya Abhiyan

जन आरोग्य अभियान

Jan Arogya Abhiyan



प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्‍वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले से आयुष्मान योजना के दूसरे चरण का ऐलान किया. प्रधानमंत्री ने बताया कि जन आरोग्य अभियान की शुरुआत 25 सितंबर से होगी. इस योजना के तहत गरीब लोगों को मुफ्त इलाज की सुविधाएं मिलेंगी.
 25 सितंबर से होगी शुरुआत-25 सितंबर के दिन पंडित दिनदयाल उपाध्याय का जन्मदिन है. इसी दिन से प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना जिसे मोदी केयर भी कहा जाता है लागू होगी. इस योजना के तहत देश के 10 करोड़ परिवारों को 5 लाख रुपए का हेल्थ बीमा मिलेगा. ये कैशलेस सुविधा होगी.
पीएम मोदी ने कहा इससे रोजगार के कई मौके पैदा होंगे. शहरों में हॉस्पिटल बनेंगे और मेडिकल स्टाफ को रोजगार मिलेगा. मोदी के मुताबिक आयुष्मान भारत योजना के लाभार्थी यूरोप की जनसंख्या के बराबर होंगे. सरकारी और चुने हुए निजी अस्पताल में इलाज की सुविधा मिलेगी. परिवार चाहे जितना बड़ा हो, उसके हर सदस्य को राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के तहत लाभ मिलेगा. महिला-पुरुष, बच्चे-बूढे सब इस योजना के लाभार्थी हो सकते है. आयुष्मान भारत योजना में उम्र की भी कोई सीमा नहीं है. इसका प्रीमियम का भुगतान केंद्र और राज्य सरकार करेंगी. केंद्र और राज्य मिलकर इस योजना को लागू करेंगे. इस योजना से उन गरीबों को फायदा मिलेगा जो अपने इलाज का खर्च नहीं उठा सकते हैं. इस योजना को लागू करने का पूरा जिम्मा राज्यों का होगा.

क्‍या है आयुष्‍मान भारत स्‍कीम?-आयुष्‍मान भारत स्‍कीम की घोषणा बजट 2019 के दौरान की गई थी. इस स्‍कीम के तहत देश के 10 करोड़ परिवारों को 5 लाख रुपए तक के फ्री हेल्थ इंश्योरेंस की सुविधा दी जाएगी. इसमें लगभग सभी गंभीर बीमारियों का इलाज कवर होगा. कोई भी व्यक्ति (विशेष रूप से महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग) इलाज से वंचित न रह जाए, इसके लिए स्कीम में फैमिली साइज और उम्र पर कोई सीमा नहीं लगाई गई है. इस स्कीम में हॉस्पिटलाइजेशन से पहले और बाद के खर्च को भी शामिल किया गया है. हर बार हॉस्पिटलाइजेशन के लिए ट्रांसपोर्टेशन अलाउंस का भी उल्लेख किया गया है, जिसका भुगतान लाभार्थी को किया जाएगा. आपको बता दें कि इसके पहले चरण की शुरुआत हो चुकी है. इसके तहत हेल्थ सेंटर्स खोले गए है. इसके बाद अब 25 सितंबर से इंश्योरेंस स्कीम शुरू होगी. इसके तहत मुफ्त में हेल्थ बीमा मिलेगा.

इस स्कीम से लोगों को मिलेंगे ये फायदे-इस स्‍कीम के तहत लगभग 50 करोड़ लोगों को सालाना 5 लाख रुपए के इलाज की मुफ्त सुविधा दी जाएगी. केंद्र सरकार की योजना इस स्‍कीम के तहत देश के लगभग 10 करोड़ परिवारों को कवर करने की है. अभी इस स्‍कीम के तहत देश के सामाजिक और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को मुफ्त इलाज की सुविधा मुहैया कराई जाएगी.
  हर परिवार को मिलेगा 5 लाख सालाना बीमा
>> राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के तहत आने वाले हर परिवार को 5 लाख रुपए का स्वास्थ्य बीमा (health insurance) कराया जाएगा. इस बीमा कवर से आप छोटे और बड़े सभी तरह के अस्पतालों में इलाज करा सकेंगे.

>> परिवार चाहे जितना बड़ा हो, उसके हर सदस्य को राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के तहत लाभ मिलेगा. महिला-पुरुष, बच्चे-बूढे सब इस योजना के लाभार्थी हो सकते है. उम्र की भी कोई सीमा नहीं है.

>> अस्पताल में भर्ती होने के पहले के स्वास्थ्य संबंधी खर्चे (pre hospitalisation expenses) और अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद के खर्चे (post-hospitalisation expenses) भी इसमें शामिल होंगे.
> पॉलिसी लेने के पहले दिन से ही ये सारी सुविधाएं मिलने लगेंगी. अस्पताल में भर्ती होने की स्थिति में आने जाने का भत्ता (निर्धारित दर पर परिवहन भत्ता-transport allowance) भी दिया जाएगा.

Sourece-: hindi.news18.com

सोमवार, 16 जुलाई 2018

बारिश का मजा दोगुना कर देगी ये रेसिपी

आलू चाट




सामग्री

उबले आलू- 3 कटे हुए
टमाटर- 1 (बारीक कटा हुआ)
हरा धनिया-  बारीक कटा 
सेव- 2 टेबल स्पून
तेल- 1 टेबल स्पून
धनिया पाउडर- आधा छोटी चम्मच
लाल मिर्च पाउडर- एक चौथहि छोटी चम्मच से कम
अदरक- आधा इंच बारीक कटा हुआ
हरी मिर्च- 1 बारीक कटी
नमक- स्वाद अनुसार
भुना जीरा पाउडर- आधा छोटी चम्मच
चाट मसाला- एक चौथहि छोटी चम्मच
काला नमक- एक चौथहि चम्मच से कम
हरे धनिया की चटनी- 2 छोटी चम्मच
मीठी चटनी- 2 छोटी चम्मच

विधि 

 आलू चाट बनाने के लिए सबसे पहले  गरम पैन में तेल डाल दीजिए। तेल के गरम होते ही, पैन में बारीक कटा अदरक तथा हरी मिर्च़ डाल दीजिए और हल्का सा भून लीजिए। फिर, इसमें धनिया पाउडर डालकर जरा सा भून लीजिए।
इसके बाद, टमाटर, नमक, काला नमक, लाल मिर्च पाउडर और आलू मसाले में मिक्स करते हुए डालिए। साथ ही भुना जीरा पाउडर, चाट मसाला, हरे धनिये की चटनी और मीठी चटनी भी डाल दीजिए। सारी सामग्रियों को अच्छी तरह से मिलने तक मिक्स कर लीजिए और गैस बंद कर दीजिए।
फिर, इसमें बारीक कटा हरा धनिया डालिए और मिला दीजिए। चाट बनकर तैयार है, इसके ऊपर थोड़ा सा हरा धनिया और सेव डालकर गार्निश कर दीजिए।

Friendship Day

Friendship Day


हमारे जीवन में मूल्यवान भूमिका निभाने व मित्रों को ध्यान में रखते हुए इसे मित्रों और दोस्ती के लिए समर्पित दिन माना जाता था। 1 9 35 में संयुक्त राज्य कांग्रेस ने अगस्त के पहले रविवार को राष्ट्रीय मित्रता दिवस के रूप में घोषित किया। तब से, राष्ट्रीय मैत्री दिवस का जश्न वार्षिक आयोजन बन गया। दोस्ती के सुंदर रिश्ते को सम्मानित करने का महान विचार लोगों के साथ अपनाया गया और जल्द ही मैत्री दिवस एक बेहद लोकप्रिय त्यौहार बन गया।
अमेरिका में मैत्री दिवस की लोकप्रियता और सफलता के बाद, कई अन्य देशों ने दोस्तों को एक दिन समर्पित करने की परंपरा को अपनाया। आज, मैत्री दिवस भारत सहित कई देशों द्वारा उत्साहपूर्वक मनाया जाता है।



1.ए सुदामा
मुझे भी सिखा दें
कोई हुनर तेरे जैसा,
मुझे भी मिल जायेगा
फिर कोई दोस्त कृष्ण जैसा।

2.दिल से दिल बड़ी मुश्किल से मिलते हैं! तुफानो में साहिल बड़ी मुश्किल से मिलते हैं!
यूँ तो मिल जाता है हर कोई! मगर आप जैसे दोस्त नसीब वालों को मिलते हैं!

3.दोस्ती इन्सान की ज़रुरत है!दिलों पर दोस्ती की हुकुमत है!
आपके प्यार की वजह से जिंदा हूँ!वरना खुदा को भी हमारी ज़रुरत है!

4.मैं भूला नहीं हूँ किसी को, मेरे बहुत कम दोस्त है ज़माने में,
बस थोड़ी जिंदगी उलझी पड़ी है 2 वक़्त की रोटी कमाने में.