शनिवार, 5 मार्च 2016

कैसे हटाएं ब्लैक हेड्स(How To Remove Black Heads)




सुंदरता पर दाग लगाने वाली कुछ समस्याओं में से एक है ब्लैक हेड्स (Black heads), जो स्किन पोर्स में गंदगी या तेल भर जाने की वजह से होती है। वैसे तो यह समस्या तैलीय त्वचा वालों को अधिक होती है लेकिन आज की अस्वस्थ और अनियमित दिनचर्या के कारण कोई भी इस परेशानी से घिर सकता है। ब्लैक हेड्स अधिकतर नाक, माथा और ठोड़ी पर होते हैं और देखने में काले धब्बे व छूने पर खुरदरे लगते हैं। कई लोग ब्लैक हेड्स को हाथों से दबाकर निकालने की कोशिश करते हैं जिससे चेहरे पर दाग पड़ जाते हैं। इस समस्या से बचने का सबसे अच्छा तरीका है घरेलू उपाय जो आसान तो हैं ही साथ ही जल्दी असर भी दिखाते हैं-
ब्लैक हेड्स को हटाने के लिए घरेलू टिप्स (Home Remedies to remove Black Heads)
शहद को गर्म करके लगाएं (Apply Warm Honey)

एक टेबल स्पून शहद को हल्का गर्म करके ब्लैक हेड्स पर लगाएं और सूखने पर धो लें। ध्यान रखें कि शहद इतना गर्म न हो की आपकी त्वचा जल जाए।
बेकिंग सोडा और पानी से निकालें ब्लैक हेड्स (Remove Black heads by Using Baking soda & Water)
तीन टेबल-स्पून पानी में एक टेबल-स्पून बेकिंग सोडा मिला लें और इस मिश्रण को नाक, माथे और ठोड़ी पर लगाकर कुछ मिनटों के लिए छोड़ दें। फिर इस गर्म पानी से धो लें।
नींबू के रस से करें ब्लैक हेड्स की सफाई (Use Lemon juice for Cleaning Black Heads )
ब्लैकहेड्स पर दिन में दो से तीन बार नींबू का रस लगाने से कुछ दिनों में वे गायब हो जाते हैं। यदि इस उपाय से अधिक जलन हो तो कोई दूसरा नुस्खा अपनाएँ।
कच्चा आलू है असरदार (Raw potato is effective)
कच्चे आलू का रस ब्लैकहेड्स पर लगाएं और सूखने पर गुनगुने पानी से धो लें। आलू से त्वचा का रंग भी निखरता है।
धनिया से ख़त्म होंगे ब्लैक हेड्स (Coriander remove black heads)
धनिया के पत्तों की डंडी को पीसकर पेस्ट बनाएं और इसमें थोड़ी सी हल्दी मिलाकर ब्लैक हेड्स पर लगाएं, सूखने के बाद पानी से धो लें। ऐसा करने से ब्लैकहेड्स समाप्त हो जायेंगे।
ब्लैक हेड्स पर रगड़ें टमाटर का गूदा (Rub Tomato Pulp on Black heads)
बिना छिलके के टमाटर को मैश करें और इस पेस्ट को 4 से 5 मिनट तक ब्लैकहेड्स पर रगड़ें। यह नुस्खा न केवल ब्लैकहेड्स को खत्म करेगा बल्कि त्वचा में कसाव भी लाएगा।

नेल आर्ट Nail Art

ऐसे अप्‍लाइ करें यह नेल आर्ट



अगर आपको अपने नाखून पर हमेशा नेल पॉलिश लगाए रखना अच्‍छा लगता है, तो नेल आर्ट आपको जरुर ट्राई करनी चाहिये। साथ ही यह मौसम भी कुछ ऐसा है कि इसमें रंग-बिरंगे रंगो से खूब सारा एक्‍सपेरिमेंट किया जा सकता है। अगर आपको भी यह नेल आर्ट लगाना हो तो अपनाएं हमारे दिए हुए कुछ खास टिप्‍स-



सिंपल टिप्‍स नेल आर्ट पाने के-
 1. सबसे पहले अपने नाखून पर लगी पुरानी नेल पॉलिश को रुई और नेल पॉलिश रिमूवर से साफ कर लें। 
2. फाइलर की मदद से नाखून के क्‍यूटिकल्‍स को साफ करें। अक्‍सर होता ये है कि नेल पॉलिश लगाते वक्‍त वह इन क्‍येटिकल्‍स में जा कर फस जाती है और दाग छोड़ देती है। 
3. इसके बाद अपने हाथों को साबुन से धोएं। नाखूनों को भी साफ करें और पांच मिनट रुकें, जबतक नाखून पूरी तरह से सूख न जाए। 
4. अब न्‍यूड पिंक नेल पॉलिश लें और देखें की नेल पॉलिश थोड़ी सी ग्‍लिट्री हो। नेल पॉलिश को लगाने से पहले उसे शेक कर लें, जिससे आपको उसका सही रंग मिल सके। 
5. इस नेल पॉलिश की एक कोट अपने नाखूनों पर ऊपर से नीचे की ओर लगाएं। अगर शेड बहुत ही लाइट है तो एक कोट और लगा सकती हैं। अब नेल पॉलिश को अच्‍छी तरह से सूखने दें। 
6. अब एक डार्क ब्‍लू रंग की नेल पॉलिश लें। इस नेल आर्ट में नीले रंग को नाखून की टिप पर लगाया जाता है, यानी की सबसे आखिर और नीचे की ओर। 
7. ब्‍लू नेल पॉलिश को उसी शेप में लगाइये, जिस शेप में आपके नाखून कटे हुए हों। अगर नाखून चौकोर आकार में कटे हैं, तो ब्‍लू कलर को उसी तरह लगाइये। ध्‍यान रहे की पिंक वाली नेल पॉलिश पर ब्‍लू नेल पॉलिश न चढ़े, वरना दोनों मिल कर कुछ और ही रंग छोड़ने लगेंगे। 
8. जब नेल पॉलिश लगा लें तो उसे पांच मिनट तक अच्‍छे से सूखने के लिये छोड़ दें। अब लास्‍ट में एक गोल्‍डन नेल आर्ट डिजाइन ले कर अपने सीध्‍ो हाथ की रिंग फिंगर के नाखून में बड़ी ही सफाई से चिपका दें। लीजिये अब आपके नाखूनों पर नेल आर्ट बन गई। 

शुक्रवार, 4 मार्च 2016

तुम पागल कैसे हुए - जोक्स




डॉक्टर :- ''तुम पागल कैसे हुए ?''
पागल :- ''मैंने एक विधवा से शादी की, 

उसकी जवान बेटी से मेरे बाप ने शादी कर ली ! 
इस तरह मेरा बाप मेरा दमाद बन गया
और मेरी बेटी मेरी माँ बन गई........॥ 
उनके घर बेटी हुर्इ तो वो मेरी बहन हुई, 
पर मैं उसकी नानी का शौहर था, 

इसीलिये वो मेरी नवासी भी हुई........ ॥
इसी तरह मेरा बेटा अपनी दादी का भाई बन गया, 
और मैं अपने बेटे का भाँजा
और मेरा बेटा अपने दादा का साला बन गया
और..


डॉक्टर :- ''चुप कर साले....
तु मुझे भी पागल करेगा क्या ?"

बाल लम्बे करने के टिप्स


परीक्षा में सफल होना है तो न भूले ये एक कहानी

कहानी





बहुत समय पहले की बात है एक राजा था। उसे राजा बने लगभग दस साल हो चुके थे। पहले कुछ साल तो उसे राज्य संभालने में कोई परेशानी नहीं आई। फिर एक बार अकाल पड़ा। उस साल लगान न के बराबर आया। राजा को यही चिंता लगी रहती कि खर्चा कैसे घटाया जाए ताकि काम चल सके। उसके बाद यही आशंका रहने लगी कि कहीं इस बार भी अकाल न पड़ जाए। उसे पड़ोसी राजाओं का भी डर रहने लगा कि कहीं हमला न कर दें।
एक बार उसने कुछ मंत्रियों को उसके खिलाफ षडयंत्र रचते भी पकड़ा था। राजा को चिंता के कारण नींद नहीं आती। भूख भी कम लगती। शाही मेज पर सैकड़ों पकवान परोसे जाते, पर वह दो-तीन कौर से अधिक न खा पाता। राजा अपने शाही बाग के माली को देखता था। जो बड़े स्वाद से प्याज व चटनी के साथ सात-आठ मोटी-मोटी रोटियां खा जाता था।

रात को लेटते ही गहरी नींद सो जाता था। सुबह कई बार जगाने पर ही उठता। राजा को उससे जलन होती। एक दिन दरबार में राजा के गुरु आए। राजा ने अपनी सारी समस्या अपने गुरु के सामने रख दी। गुरु बोले वत्स यह सब राज-पाट की चिंता के कारण है इसे छोड़ दो या अपने बेटे को सौंप दो तुम्हारी नींद और भूख दोनों वापस आ जाएंगी।

राजा ने कहा नहीं गुरुदेव वह तो पांच साल का अबोध बालक है। इस पर गुरु ने कहा ठीक है फिर इस चिंता को मुझे सौंप दो। राजा को गुरु का सुझाव ठीक लगा। उसने उसी समय अपना राज्य गुरु को सौंप दिया। गुरु ने पूछा अब तुम क्या करोगे। राजा ने कहा कि मैं व्यापार करूंगा। गुरु ने कहा राजा अब यह राजकोष तो मेरा है। तुम व्यापार के लिए धन कहां से लाओगे। राजा ने सोचा और कहा तो मैं नौकरी कर लूंगा।

इस पर गुरु ने कहा यदि तुमको नौकरी ही करनी है तो मेरे यहां नौकरी कर लो। मैं तो ठहरा साधूु मैंं आश्रम में ही रहूंगा, लेकिन इस राज्य को चलाने के लिए मुझे एक नौकर चाहिए। तुम पहले की तरह ही महल में रहोगे। गद्दी पर बैठोगे और शासन चलाओगे, यही तुम्हारी नौकरी होगी। राजा ने स्वीकार कर लिया और वह अपने काम को नौकरी की तरह करने लगा। फर्क कुछ नहीं था काम वही था, लेकिन अब वह जिम्मेदारियों और चिंता से लदा नहीं था।

कुछ महीनों बाद उसके गुरु आए। उन्होंने राजा से पूछा कहो तुम्हारी भूख और नींद का क्या हाल है। राजा ने कहा- मालिक अब खूब भूख लगती है और आराम से सोता हूं। गुरु ने समझाया देखें सब पहले जैसेा ही है, लेकिन पहले तुमने जिस काम को बोझ की गठरी समझ रखा था। अब सिर्फ उसे अपना कर्तव्य समझ कर रहे हो। हमें अपना जीवन कर्तव्य करने के लिए मिला है। किसी चीज को जागीर समझकर अपने ऊपर बोझ लादने के लिए नही।

सीख: 1. काम कोई भी हो चिंता उसे और ज्यादा कठिन बना देती है।
2. जो भी काम करें उसे अपना कर्तव्य समझकर ही करें। ये नहीं भूलना चाहिए कि हम न कुछ लेकर आए थे और न कुछ लेकर जाएंगे।

महाशिवरात्रि

महाशिवरात्रि की पवित्र प्रामाणिक कथा



पूर्व काल में चित्रभानु नामक एक शिकारी था। जानवरों की हत्या करके वह अपने परिवार को पालता था। वह एक साहूकार का कर्जदार था, लेकिन उसका ऋण समय पर न चुका सका। क्रोधित साहूकार ने शिकारी को शिवमठ में बंदी बना लिया। संयोग से उस दिन शिवरात्रि थी। शिकारी ध्यानमग्न होकर शिव-संबंधी धार्मिक बातें सुनता रहा। चतुर्दशी को उसने की कथा भी सुनी। 

शाम होते ही साहूकार ने उसे अपने पास बुलाया और ऋण चुकाने के विषय में बात की। शिकारी अगले दिन सारा ऋण लौटा देने का वचन देकर बंधन से छूट गया। अपनी दिनचर्या की भाँति वह जंगल में शिकार के लिए निकला। लेकिन दिनभर बंदी गृह में रहने के कारण भूख-प्यास से व्याकुल था। शिकार खोजता हुआ वह बहुत दूर निकल गया। जब अंधकार हो गया तो उसने विचार किया कि रात जंगल में ही बितानी पड़ेगी। वह वन एक तालाब के किनारे एक बेल के पेड़ पर चढ़ कर रात बीतने का इंतजार करने लगा। 

बिल्व वृक्ष के नीचे शिवलिंग था जो बिल्वपत्रों से ढँका हुआ था। शिकारी को उसका पता न चला। पड़ाव बनाते समय उसने जो टहनियाँ तोड़ीं, वे संयोग से शिवलिंग पर गिरती चली गई। इस प्रकार दिनभर भूखे-प्यासे शिकारी का व्रत भी हो गया और शिवलिंग पर बिल्वपत्र भी चढ़ गए। एक पहर रात्रि बीत जाने पर एक गर्भिणी हिरणी तालाब पर पानी पीने पहुँची। 

शिकारी ने धनुष पर तीर चढ़ाकर ज्यों ही प्रत्यंचा खींची, हिरणी बोली, 'मैं गर्भिणी हूँ। शीघ्र ही प्रसव करूँगी। तुम एक साथ दो जीवों की हत्या करोगे, जो ठीक नहीं है। मैं बच्चे को जन्म देकर शीघ्र ही तुम्हारे समक्ष प्रस्तुत हो जाऊँगी, तब मार लेना।' शिकारी ने प्रत्यंचा ढीली कर दी और हिरणी जंगली झाड़ियों में लुप्त हो गई। प्रत्यंचा चढ़ाने तथा ढीली करने के वक्त कुछ बिल्व पत्र अनायास ही टूट कर शिवलिंग पर गिर गए। इस प्रकार उससे अनजाने में ही प्रथम प्रहर का पूजन भी सम्पन्न हो गया। 

कुछ ही देर बाद एक और हिरणी उधर से निकली। शिकारी की प्रसन्नता का ठिकाना न रहा। समीप आने पर उसने धनुष पर बाण चढ़ाया। तब उसे देख हिरणी ने विनम्रतापूर्वक निवेदन किया, 'हे शिकारी! मैं थोड़ी देर पहले ऋतु से निवृत्त हुई हूँ। कामातुर विरहिणी हूँ। अपने प्रिय की खोज में भटक रही हूँ। मैं अपने पति से मिलकर शीघ्र ही तुम्हारे पास आ जाऊँगी।' शिकारी ने उसे भी जाने दिया। दो बार शिकार को खोकर उसका माथा ठनका। वह चिंता में पड़ गया। रात्रि का आखिरी पहर बीत रहा था। इस बार भी धनुष से लग कर कुछ बेलपत्र शिवलिंग पर जा गिरे तथा दूसरे प्रहर की पूजन भी सम्पन्न हो गई।

तभी एक अन्य हिरणी अपने बच्चों के साथ उधर से निकली। शिकारी के लिए यह स्वर्णिम अवसर था। उसने धनुष पर तीर चढ़ाने में देर नहीं लगाई। वह तीर छोड़ने ही वाला था कि हिरणी बोली, 'हे शिकारी!' मैं इन बच्चों को इनके पिता के हवाले करके लौट आऊँगी। इस समय मुझे मत मारो। शिकारी हँसा और बोला, सामने आए शिकार को छोड़ दूँ, मैं ऐसा मूर्ख नहीं। इससे पहले मैं दो बार अपना शिकार खो चुका हूँ। मेरे बच्चे भूख-प्यास से व्यग्र हो रहे होंगे। उत्तर में हिरणी ने फिर कहा, जैसे तुम्हें अपने बच्चों की ममता सता रही है, ठीक वैसे ही मुझे भी। हे शिकारी! मेरा विश्वास करों, मैं इन्हें इनके पिता के पास छोड़कर तुरंत लौटने की प्रतिज्ञा करती हूँ। 

हिरणी का दीन स्वर सुनकर शिकारी को उस पर दया आ गई। उसने उस मृगी को भी जाने दिया। शिकार के अभाव में तथा भूख-प्यास से व्याकुल शिकारी अनजाने में ही बेल-वृक्ष पर बैठा बेलपत्र तोड़-तोड़कर नीचे फेंकता जा रहा था। पौ फटने को हुई तो एक हृष्ट-पुष्ट मृग उसी रास्ते पर आया। शिकारी ने सोच लिया कि इसका शिकार वह अवश्य करेगा। शिकारी की तनी प्रत्यंचा देखकर मृग विनीत स्वर में बोला, हे शिकारी! यदि तुमने मुझसे पूर्व आने वाली तीन मृगियों तथा छोटे-छोटे बच्चों को मार डाला है, तो मुझे भी मारने में विलंब न करो, ताकि मुझे उनके वियोग में एक क्षण भी दुःख न सहना पड़े। मैं उन हिरणियों का पति हूँ। यदि तुमने उन्हें जीवनदान दिया है तो मुझे भी कुछ क्षण का जीवन देने की कृपा करो। मैं उनसे मिलकर तुम्हारे समक्ष उपस्थित हो जाऊँगा।

मृग की बात सुनते ही शिकारी के सामने पूरी रात का घटनाचक्र घूम गया, उसने सारी कथा मृग को सुना दी। तब मृग ने कहा, 'मेरी तीनों पत्नियाँ जिस प्रकार प्रतिज्ञाबद्ध होकर गई हैं, मेरी मृत्यु से अपने धर्म का पालन नहीं कर पाएँगी। अतः जैसे तुमने उन्हें विश्वासपात्र मानकर छोड़ा है, वैसे ही मुझे भी जाने दो। मैं उन सबके साथ तुम्हारे सामने शीघ्र ही उपस्थित होता हूँ।' 

शिकारी ने उसे भी जाने दिया। इस प्रकार प्रात: हो आई। उपवास, रात्रि-जागरण तथा शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ने से अनजाने में ही पर शिवरात्रि की पूजा पूर्ण हो गई। पर अनजाने में ही की हुई पूजन का परिणाम उसे तत्काल मिला। शिकारी का हिंसक हृदय निर्मल हो गया। उसमें भगवद्शक्ति का वास हो गया। 

थोड़ी ही देर बाद वह मृग सपरिवार शिकारी के समक्ष उपस्थित हो गया, ताकि वह उनका शिकार कर सके।, किंतु जंगली पशुओं की ऐसी सत्यता, सात्विकता एवं सामूहिक प्रेमभावना देखकर शिकारी को बड़ी ग्लानि हुई। उसने मृग परिवार को जीवनदान दे दिया। 

अनजाने में शिवरात्रि के व्रत का पालन करने पर भी शिकारी को मोक्ष की प्राप्ति हुई। जब मृत्यु काल में यमदूत उसके जीव को ले जाने आए तो शिवगणों ने उन्हें वापस भेज दिया तथा शिकारी को शिवलोक ले गए। शिव जी की कृपा से ही अपने इस जन्म में राजा चित्रभानु अपने पिछले जन्म को याद रख पाए तथा महाशिवरात्रि के महत्व को जान कर उसका अगले जन्म में भी पालन कर पाए। 

शिवकथा का संदेश 
शिकारी की कथानुसार महादेव तो अनजाने में किए गए व्रत का भी फल दे देते हैं। पर वास्तव में महादेव शिकारी की दया भाव से प्रसन्न हुए। अपने परिवार के कष्ट का ध्यान होते हुए भी शिकारी ने मृग परिवार को जाने दिया। यह करुणा ही वस्तुत: उस शिकारी को उन पण्डित एवं पूजारियों से उत्कृष्ट बना देती है जो कि सिर्फ रात्रि जागरण, उपवास एव दूध, दही, एवं बेल-पत्र आदि द्वारा शिव को प्रसन्न कर लेना चाहते हैं। इस कथा में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस कथा में 'अनजाने में हुए पूजन' पर विशेष बल दिया गया है। इसका अर्थ यह नहीं है कि शिव किसी भी प्रकार से किए गए पूजन को स्वीकार कर लेते हैं अथवाजाने या अनजाने में हुए पूजन में भेद नहीं कर सकते हैं। 

वास्तव में वह शिकारी शिव पूजन नहीं कर रहा था। इसका अर्थ यह भी हुआ कि वह किसी तरह के किसी फल की कामना भी नहीं कर रहा था। उसने मृग परिवार को समय एवं जीवन दान दिया जो कि शिव पूजन के समान है। शिव का अर्थ ही कल्याण होता है। उन निरीह प्राणियों का कल्याण करने के कारण ही वह शिव तत्व को जान पाया तथा उसका शिव से साक्षात्कार हुआ। 

परोपकार करने के लिए महाशिवरात्रि का दिवस होना भी आवश्यक नहीं है। पुराण में चार प्रकार के शिवरात्रि पूजन का वर्णन है।मासिक शिवरात्रि, प्रथम आदि शिवरात्रि, तथा महाशिवरात्रि। पुराण वर्णित अंतिम शिवरात्रि है-नित्य शिवरात्रि। वस्तुत: प्रत्येक रात्रि ही 'शिवरात्रि' है अगर हम उन परम कल्याणकारी आशुतोष भगवान में स्वयं को लीन कर दें तथा कल्याण मार्ग का अनुसरण करें, वही शिवरात्रि का सच्चा व्रत है। 

गुरुवार, 3 मार्च 2016

राष्ट्रीय स्वास्थ बीमा योजना(RSBY)

राष्ट्रीय स्वास्थ बीमा योजना






Rashtriya swasthya bima yojana rsby hindi भारत सरकार का उद्देश्य है कि वे अपनी जनता को एक सामाजिक सुरक्षा व स्वस्थ जीवन दें, जिसके लिए सरकार हमेशा कुछ न कुछ नयी योजना लेकर आती रही है. राष्ट्रीय स्वास्थ बीमा योजना (RSBY) भारत सरकार द्वारा निकाली गई ऐसी योजना है जिसके तहत गरीबों का मेडिकल इंशोरेंस कराया जाता है, ये कैशलेस स्वास्थ्य बीमा सरकारी व प्राइवेट दोनों हॉस्पिटल में होता है. यह योजना कांग्रेस सरकार द्वारा 1 अप्रैल 2008 को देश के 25 राज्यों में शुरू की गई थी. फ़रवरी 2014 तक इस योजना के अन्तर्गत भारत के 36 लाख परिवार ने अपना नाम इस योजना में पंजीकृत कराया था. शुरुवात में इस योजना को सरकारी लेबर मंत्रालय व कर्मचारी के साथ शुरू किया गया था, लेकिन अप्रैल 2015 से इसे स्वास्थ व पारिवारिक मंत्रालय के तहत चलाया जा रहा है.

राष्ट्रीय स्वास्थ बीमा योजना

Rashtriya Swasthya Bima Yojana (RSBY)

इस योजना का मुख्य उद्देश्य गरीबी रेखा से नीचे आने वालो को स्वस्थ जीवन देना है. देश में ऐसे बहुत से परिवार है जो गरीबी के चलते अपना इलाज नहीं करा पाते है, ऐसे ही लोगों की परेशानी दूर करने के लिए ये योजना है. योजना के अन्तर्गत पहले सिर्फ गरीबी रेखा से नीचे आने वाले पंजीकरन करा सकते थे, लेकिन अब इसका लाभ ये सब लोग भी उठा सकते है-
  • बिल्डिंग व निर्माण करने वाले कर्मचारी
  • रेलवे कुली (जिनके पास लाइसेंस है)
  • फूटपाथ विक्रेता
  • MNREGA कर्मचारी
  • बीड़ी कर्मचारी
  • घरेलु कर्मचारी
  • स्वछता कर्मचारी
  • माइन कर्मचारी
  • रिक्शा चलाने वाले
  • कूड़ा बीनने वाले
  • ऑटो/टैक्सी चलाने वाले
योजना बनाते समय इसमें पार्टनर के तौर पर केन्द्रीय सरकार व प्रदेश सरकार दोनों ने मिलकर काम किया व इन्वेस्ट किया था. योजना बनाते समय इसका टारगेट 70 लाख परिवार को इस योजना का लाभ देना है, जिसे 5 साल की योजना (2012 – 2017) के तहत बनाया गया है. इस योजना के तहत आपको जब चाहें पैसा मिलेगा, अपनी पसंद के हॉस्पिटल में इलाज, प्राइवेट हॉस्पिटल में इलाज, कैशलेस सर्विस मिलेगी. ये सब सर्विस उनको मिलेंगी जिन्होंने पंजीकरण करने समय सारी जानकारी अच्छे से भरी होगी.
राष्ट्रीय स्वास्थ बीमा योजना (RSBY) मुख्य लक्ष्य –
  1. आपतिजनक परिस्तिथि में आर्थिक सुरक्षा देना
  2. गरीबी रेखा से नीचे आने वालों को एक अच्छी स्वास्थ सेवा देना, जिससे देश में स्वास्थ दर में वृद्धि हो, व अच्छे स्वास्थ केंद्र व हॉस्पिटल का निर्माण हो.
राष्ट्रीय स्वास्थ बीमा योजना (RSBY) का विवरण –
राष्ट्रीय स्वास्थ बीमा योजना के तहत लाभ उठाने वाले ग्राहक के परिवार को प्रति वर्ष हॉस्पिटल खर्चे के रूप में टोटल 30 हजार रूपए दिए जायेंगें, जो कि प्रत्येक फॅमिली को दिया जायेगा, यह खर्च सीरियस बीमारियों के लिए ही दिया जायेगा. इस योजना के अन्तर्गत बहुत से पैकेज उपलब्ध है जिनका चुनाव कर आगे लाभ उठाया जा सकता है. पैकेज अलग अलग बीमारियों के हिसाब से बनाये गए है. सरकार ने बहुत से ऐसे पैकेज रेट बनाये है जिसमें हॉस्पिटल का हस्तक्षेप रहता है व जिससे ज्यादा से ज्यादा लोग योजना की ओर आकर्षित होते है.
योजना में उम्र की कोई सीमा नहीं है, इस योजना का लाभ कोई भी आयु वर्ग उठा सकता है. इसमें एक परिवार के 5 लोगों को लेते है, जिसमें एक परिवार का मुखिया होता है. अगर परिवार के किसी सदस्य को हॉस्पिटल में भर्ती कराया जाता है, तो हॉस्पिटल फॉर्म के 100 रुपय भी इसी पैकेज के अंदर आयेंगें, 1 साल में इसके लिए 1 परिवार को ज्यादा से ज्यादा 1000 रूपए मिलेंगें. योजना में पंजीकरण करने के लिए 1 परिवार को अपने सभी सदस्य के लिए सिर्फ 30 रुपय देना होगा, जो सालाना फीस होगी, बाकि सब प्रदेश व केन्द्रीय सरकार भुगतान किया करेगी. 1 साल पूरा होने पर परिवार के मुखिया को इस योजना के लिए फिर से पंजीकरण कराना होगा, जिसके लिए उसे फिर 30 रुपय देने होंगे. हर प्रदेश में इस योजना को चलाने के लिए स्टेट नोडल एजेंसी (SNA) बनाई गई है, जो योजना को सुचारू रूप से चलाने में मदद करती है व इंश्योरेंस कंपनी, हॉस्पिटल, जिलाधिकारी व लोकल धारकों से बातचीत कर उनके काम में मदद करती है.
राष्ट्रीय स्वास्थ बीमा योजना (RSBY) की विशेषताएं–
भारत सरकार द्वारा यह पहली बार नहीं है कि गरीबों के लिए स्वास्थ्य योजना चलाई जा रही है. पहले की सरकार ने भी ऐसी योजना से गरीबों का भला चाहा था लेकिन वे आकर चली भी गई और पता भी चला. पुरानी स्वास्थ्य योजना की गलतियों से सीखकर अब की बार सरकार ने राष्ट्रीय स्वास्थ बीमा योजना (RSBY) बनाई है. इसमें क्या विशेषताएं हैं आइये जाने –
  • लाभार्थी को सशक्त बनाना – RSBY योजना के तहत धारक को यह अधिकार है कि वह प्राइवेट व सरकारी हॉस्पिटल में से अपने लिए बेहतर हॉस्पिटल चुन सके. योजना बीमा कंपनियों के साथ मिलकर हॉस्पिटल को भी मौका देती है कि जिससे उसे भी पैसा मिले.
  • धारकों के लिए काम का जरिया – योजना सामाजिक सेक्टर के लिए बिजनेस मॉडल तैयार करता है, जिससे हर एक हितधारकों को राशी के साथ फायदा मिल सके. इस बिजनेस मॉडल से योजना का विस्तार भी होता है व स्थिरता भी आती है.
  • बीमा कम्पनी – बीमा कंपनीयां हर एक धारक का जिसने RSBY में पंजीकरण कराया है, उसका प्रीमियम भरती है. ऐसा करने से धारक इस योजना की ओर आकर्षित होते है, और ज्यादा से ज्यादा लोग इस योजना से जुड़ते है.
  • हॉस्पिटल्स –योजना के अंतर्गत हॉस्पिटल ज्यादा से ज्यादा धारकों को अच्छा ट्रीटमेंट देते है, सरकारी अस्पताल के पास भी इस योजना के तहत राशी होती है जो बीमा company उन्हें देती है, जिससे वो धारकों का अच्छा इलाज कर सकते है.
  • NGO – बहुत से NGO व सामाजिक संस्थान इस योजना की मदद के लिए सामने से हाथ बढ़ाते है, व ये लोगों को इस योजना से जुड़ने के लिए प्रोत्साहित करते है.
  • सरकार – हमारे देश की सरकार इतनी सक्षम है कि वे गरीबों को एक अच्छी गुणवत्ता वाला स्वास्थ्य दे सकती है. योजना के अनुसार सरकार एक परिवार के लिए सालाना 750 रूपए प्रीमियम भरती है. ऐसी योजना से सरकारी व प्राइवेट हॉस्पिटल के बीच प्रतियोगिता बढ़ेगी जिससे आम जनता को फायदा होगा और कम से कम पैसों में अच्छा इलाज होगा.
  • सुरक्षित व फूलप्रूफ – योजना धारकों को सरकार की तरफ से स्मार्ट कार्ड मिलेगा, जिसमें सारी जानकारी होगी. यह बहुत सुरक्षित व आसन है. मैनेजमेंट ने इसे पूरी तरह से सोच समझ कर बनाया है, जिससे किसी भी धारक का कोई नुकसान ना हो और उसे अच्छी से अच्छी सेवा मिले. कार्ड को चलाने को हक सिर्फ उसे होगा जिसके नाम पर वह होगा व उसके फिंगर प्रिंट के बाद ही कार्ड खुल सकेगा.
  • पोर्टेबिल्टी – RSBY धारक ने जिस किसी जिला से अपना पंजीकरण कराया है, वह अपने स्मार्ट कार्ड को RSBY के अन्तर्गत आने वाले देश के किसी भी हॉस्पिटल में अपना इलाज करा सकता है. यह योजना बहुत यूनिक है जो गरीबों के बहुत काम की है, वे जब चाहें जहाँ चाहें इसका उपयोग कर सकते है.
  • कैशलेस व बिना पेपर का काम – धारक को RSBY के अन्तर्गत आने वाले किसी भी हॉस्पिटल में कैशलेस का फायदा मिलेगा. धारक को बस अपने साथ अपना स्मार्ट कार्ड रखना होगा जिसके लिए उसका फिंगर वेरीफिकेशन होगा. धारक को बीमा कंपनी को बीमारी के किसी भी कागज को देने व दिखाने की जरुरत नहीं होगी. उनको बस ऑनलाइन क्लेम करना होगा जिससे खाते में खुद पैसा आ जायेगा.
कौन होगा धारक – गरीबी रेखा से नीचे आने वाला कोई भी परिवार जिसका नाम जिला में प्रदेश सरकार द्वारा लिखित है, इस योजना का फायदा उठा सकते है. योग्य परिवार को नामांकन करने के लिए उसके केंद्र जाना होगा, वहां सब जानकारी देकर वो पंजीकरण करा सकता है.

बुधवार, 2 मार्च 2016

धर्म क्या है ?

धर्म का अर्थ


धर्म को जानने के लिए हमें धर्म का अर्थ जानना पड़ेगा |

मनु कहते है मनु स्मृति में
आहार-निद्रा-भय-मैथुनं च समानमेतत्पशुभिर्नराणाम् । धर्मो हि तेषामधिको विशेषो धर्मेण हीनाः पशुभिः समानाः ॥
अर्थ – अगर किसी मनुष्य में धार्मिक लक्षण नहीं है और उसकी गतिविधी केवल आहार ग्रहण करने, निंद्रा में,भविष्य के भय में अथवा संतान उत्पत्ति में लिप्त है, वह पशु के समान है क्योकि धर्म ही मनुष्य और पशु में भेद करता हैं|

दस लक्षण जो कि धार्मिक मनुष्यों में मिलते हैं

मनु स्मृति में मनु आगे कहते है कि निम्नलिखित गुण धार्मिक मनुष्यों में मिलते हैं|
धृति क्षमा दमोस्तेयं, शौचं इन्द्रियनिग्रहः । धीर्विद्या सत्यं अक्रोधो, दसकं धर्म लक्षणम ॥
  • धृति = प्रतिकूल परिस्थितियों में भी धैर्य न छोड़ना , अपने धर्म के निर्वाह के लिए
  • क्षमा = बिना बदले की भावना लिए किसी को भी क्षमा करने की
  • दमो = मन को नियंत्रित करके मन का स्वामी बनना
  • अस्तेयं = किसी और के द्वारा स्वामित्व वाली वस्तुओं और सेवाओं का उपयोग नहीं करना, यह चोरी का बहुत व्यापक अर्थ है , यहाँ अगर कोई व्यक्ति किसी और व्यक्ति की वस्तुओ या सेवाओ का उपभोग करने की सोचता भी है तो वह धर्म विरूद्ध आचरण कर रहा हैं
  • शौचं = विचार, शब्द और कार्य में पवित्रता
  • इन्द्रियनिग्रहः= इंद्रियों को नियंत्रित कर के स्वतंत्र होना
  • धी = विवेक जो कि मनुष्य को सही और गलत में अंतर बताता हैं
  • र्विद्या = भौतिक और अध्यात्मिक ज्ञान
  • सत्यं = जीवन के हर क्षेत्र में सत्य का पालन करना, यहाँ मनु यह भी कहते है कि सत्य को प्रमाणित करके ही उसे सत्य माना जाये
  • अक्रोधो = क्रोध का अभाव क्योंकि क्रोध ही आगे हिंसा का कारण होता हैं
यह दस गुण सभी मनुष्यों में मिलते है अन्यथा वह पशु समान है|

वैदिक धर्म एवं दुसरे मतों में अंतर

धर्म को अंग्रेजी में अनुवाद करके religion बोला जाता है जो कि पूर्णतया गलत हैं | अगर हम थोडा जानने की कोशिश करे तो हमें पता चलेगा कि ‘धर्म’ शब्द का अनुवाद संभव नहीं हैं क्योंकि उनके पास कोई शब्द ही नहीं हैं | संछेप में कहे तो ‘religion’ शब्द का अर्थ है कि ‘किसी पारलौकिक शक्ति में विश्वास करना और उसकी पूजा करना’ जबकि धर्म का अर्थ है कि ‘विचार, शब्द और कार्य में धार्मिक गुण होना’ (जिनका हम विवेचन कर चुके हैं )|
धर्म सर्वव्यापी ईश्वर से हैं जो कि मनुष्यमात्र के लिए है और religion या पंथ किसी मनुष्य से हैं जो कि सम्प्रदाय विशेष के लिए होता है |
धर्म की एक और विशेषता हैं कि जो भी ईश्वरकृत हैं वह हमें पहले मिल जाता हैं , उसके बाद हम उसका उपभोग करते है परन्तु जो मानवकृत हैं पहले हमें उस वस्तु विशेष की आवश्यकता होती हैं उसके बाद हम समाधान ढूढ़ते हैं | उदाहरण के लिए जब मानव धरती में आया वह यहाँ रह पाया क्योंकि ईश्वर ने पहले ही धरती की रचना कर दी थी | मनुष्य सूर्य के प्रकाश से देख पा रहा था क्योंकि ईश्वर ने पहले ही सूर्य का सृजन कर दिया था लेकिन रात्रि में अंधकारमय सब कुछ हो जाता था, इसीलिए मनुष्य ने ऊर्जा से बल्ब का निर्माण किया| हम यहाँ यही समझाने का प्रयत्न कर रहे है कि हर religion या पंथ का कोई न कोई संस्थापक हैं जो कि एक मनुष्य है जबकि वैदिक धर्म का कोई संस्थापक नहीं हैं | संछेप में धर्म ईश्वर द्वारा पृथ्वी के हर मनुष्यों को दिया गया हैं जबकि religion या पंथ मनुष्य द्वारा किसी वर्ग विशेष के प्रबन्धन के लिए बनाया गया हैं| उदाहरण से समझते हैं |
  • अगर हम ‘महावीर जैन’ को हटा दे जो कि अंतिम तीर्थकर एवम् जैन मत के संस्थापक थे जिनका जन्म 540 या 599 ईसा पूर्व में हुआ था, तो कोई जैन मत नहीं था | असल में इससे पहले के सारे तीर्थकर जिसमे पहले तीर्थकर ‘रिषभ देव‘ भी हैं सभी आर्य ही थे |
  • अगर हम ‘गौतम बुद्ध‘ को हटा दे , बौद्ध मत के संस्थापक जिनका जन्म 483 या 400 ईसा पूर्व में हुआ था, तो कोई बौद्ध मत नहीं था | यह बात अलग है कि हिन्दू गौतम बुद्ध को पूजते है पर गौतम बुद्ध और बुद्ध देव दोनो अलग हैं |
  • अगर हम ‘ईसा मसीह ‘ को हटा दे , जिनका जन्म 7-2 ईसा पूर्व में हुआ था तो कोई इसाई मत नहीं था |
  • अगर हम ‘मुहम्मद‘ को हटा दे , जिनका जन्म 570 इसाई युग में हुआ था तो कोई इस्लाम मत नहीं था |
  • गुरु गोबिन्द सिंह जी ने वैदिक धर्म की रक्षा के लिए 30 मार्च , 1699 इसाई युग में खाल्सा का निर्माण किया | ‘खाल्सा’ का अर्थ है ‘शुद्ध’ एवम ‘सिख’ का अर्थ हैं ‘शिष्य’| प्रथम ‘पंज प्यारे’ में कोई भी पंजाब से नहीं था |
  • अगर हम ‘श्री राम’ एवं ‘श्री कृष्ण’ को हटा भी दे जिनका जन्म 10 जनवरी, 5114 ईसा पूर्व और 18 जुलाई, 3228 ईसा पूर्व में हुआ था, उसके हजारो साल पहले भी वैदिक धर्म समृद्ध था |
क्योंकि वे वैदिक धर्म के संस्थापक नहीं है न ही वे नियम निर्धारित करते हैं | उन्होंने केवल धर्म की , प्राकृतिक नियम जो पहले से थे उनकी पुनर्स्थापना की | इसीलिए वह हमारे महापुरुष हैं और हम उनका सम्मान करते हैं क्योंकि हमारा ये मानना है कि एक मुक्त आत्मा हमारे आत्म-साछात्कर में सहायता कर सकती हैं |
यह वैदिक धर्म को अधिक आकर्षित बना देता है क्योंकि इसका कोई संस्थापक नहीं है और इसके नियम कानून,समाज या दुनिया के किसी भी सदस्य के लिए लागू होते है कारण इसका सिद्धांत हैं ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ जिसका अर्थ हैं कि ‘पूरी दुनिया मेरा परिवार है’ |

स्रोत

मंगलवार, 1 मार्च 2016

एंड्रॉइड, ब्लैकबेरी और विंडोज पर बंद होगा वाट्सऐप

एंड्रॉइड, ब्लैकबेरी और विंडोज पर बंद होगा वाट्सऐप


वाट्सऐप ने 2016 के बाद कई मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम के लिए सपोर्ट बंद करने की घोषणा की है। इस लिस्ट में ब्लैकबेरी और नोकिया के ऑपरेटिंग सिस्टम के अलावा एंड्रॉइड और विंडोज OS के पुराने वर्जन भी शामिल हैं। नया फोन लेने के लिए कहा...
- सपोर्ट बंद होने वाले OS की लिस्ट में सबसे बड़ा नाम ब्लैकबेरी 10 OS का है। इसके अलावा ब्लैकबेरी के अन्य ऑपरेटिंग सिस्टम के लिए भी सपोर्ट नहीं मिलेगा।
- नोकिया के पुराने फोन जो सिंबियन S40 और सिंबियन S60 OS को सपोर्ट करते हैं उन पर भी 2017 से वाट्सऐप सपोर्ट नहीं मिलेगा।
- एंड्रॉइड 2.1 एक्लेयर, एंड्रॉइड 2.2 फ्रोयो के अलावा विंडोज फोन 7.1 डिवाइसेस के लिए भी अगले साल से वाट्सऐप सपोर्ट बंद हो जाएगा।
- कंपनी ने अपने एक ब्लॉग पोस्ट में इस फैसले के बारे में जानकारी दी।
- कंपनी ने इस तरह के मोबाइल फोन यूजर्स को अपना पुराना फोन जल्द ही नए OS वाले फोन से अपग्रेड करने के लिए कहा है।


कंपनी ने कहा कठिन फैसला

कंपनी के मुताबिक साल 2009 में जब उन्होंने वाट्सऐप लॉन्च किया था तब मार्केट के हालात कुछ और थे। उस वक्त एंड्रॉइड और iOS की मार्केट हिस्सेदारी 25% से भी कम थी, वहीं नोकिया और ब्लैकबेरी का मार्केट शेयर करीब 70% था। लेकिन अब बदले हालात को देखते हुए ये डिसीजन लिया गया है।
- कंपनी ने इस फैसले को कठिन बताते हुए, अच्छी सर्विसेस देने के लिए इसे जरूरी बताया।

ऑयली स्किन है तो ऐसे करें मेकअप

ऑयली स्किन है तो ऐसे करें मेकअप


अक्सर मेकअप करने के बावजूद अगर आपकी त्वचा पर वह निखार नहीं आ पाता है तो अपने स्क‍िन टाइप के अनुसार मेकअप करें. वैसे ऐसी समस्या खासतौर पर ऑयली त्वचा के साथ ज्यादा होती है. ऐसे में मेकअप करते समय बेस का खास ध्यान रखें.- मेकअप करने से पहले चेहरे को अच्छी तरह धो लें. हो सके तो हल्का स्क्रब कर लें. इससे ब्लैक हेड्स निकल जाएंगे. इसके बाद माइल्ड टोनर से चेहरा साफ कर लें. टोनर चेहरे के अतिरिक्त तेल को सोख लेता है.

 

Tips for Glowing Skin | ग्लोइंग स्किन टिप्स


ऑयली स्किन होने पर ऑयल फ्री फाउंडेशन का चुनाव सही रहेगा. यह त्वचा के दिखने वाले रोम छिद्रों को भर देता है और चेहरे की रौनक भी देर तक बनाए रखता है. अगर त्वचा बहुत ज्यादा ऑयली है या गर्मी के मौसम में मेकअप कर रही हैं तो फाउंडेशन से पहले चेहरे पर बर्फ लगाना फायदा देगा.


ऑयली त्वचा पर मुंहासे या इनके दाग नजर आते हैं. इससे बचने के लिए कंसीलर लगाएं और जब भी इसे खरीदें, ध्यान में रखें कि यह त्वचा की रंगत से मेल खाता हुआ हो. वरना आपके चेहरे पर पैच नजर आएंगे.

कंसीलर और फाउंडेशन लगाने के बाद मे‍कअप को ट्रांसलूसेंट पाउडर से सेट करें. इससे मेकअप देर तक टिकेगा और फैलेगा भी नहीं.