शुक्रवार, 19 अगस्त 2016

कैसे साफ करें जले हुए बर्तन, जानें ऐसे ही घरेलू नुस्खे

किचन के बर्तनों में कुछ भी जल जाए तो उसे छुड़ाना बहुत मुश्किल होता है। इतनी मेहनत करने के बजाए कुछ आसान टिप्स अपनाकर भी इन बर्तनों को चमका सकते हैं। इसके लिए ज्यादा कुछ नहीं करना, क्योंकि सभी कुछ किचन में आसानी से मिल जाएगा।


किचन क्लीन टिप्स









Source- bhaskar

शुक्रवार, 12 अगस्त 2016

इन 7 चीजों को दोबारा गर्म करके न खाएं

क्या आप किसी खाने की चीज को बार-बार गर्म करके खाते हैं? यह अच्छी आदत है, लेकिन कुछ चीजें दोबारा गर्म करके खाने से वे सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकती हैं। हम बता रहे हैं ऐसी 7 चीजों के बारे में जिन्हें दोबारा गर्म करने से बचना चाहिए


1. आलू आलू को गर्म करने के बाद ठंडा करने के दौरान botulism बैक्टीरिया पनपने लगता है। इससे फूड प्वाइजनिंग हो सकती है। जितनी बार गर्म करेंगे, उतनी बार यह बैक्टीरिया पैदा होगा। गर्म करने पर भी यह खत्म नहीं होता है।



2. पालक इसमें नाइट्रेट की मात्रा काफी होती है। रीहीट करने पर नाइट्रेट, कार्सिनोजेनिक (जहरीला) तत्वों में बदल जाता है।



3. चुकंदर पालक की तरह चुकंदर में भी नाइट्रेट काफी अधिक होते हैं। इसलिए चुकंदर को रीहीट करने से भी सेहत को नुकसान पहुंच सकता है।


4. चिकन फ्रिज में रखे हुए ठंडे चिकन को दोबारा गर्म करने से उसमें मौजूद प्रोटीन का कम्पोजिशन बदल सकता है। इसे खाने से इन-डाइजेशन की प्रॉब्लम हो सकती है।




5. तेल इसे दोबारा गर्म करने से इसमें aldehydes नामक केमिकल निकलता है जो टॉक्सिक होता है। यह केमिकल न्यूरो से संबंधित रोगों व कैंसर के लिए जिम्मेदार होता है।



6. मशरूम इसमें प्रोटीन कम्पोजिशन बहुत ही जटिल होता है। दोबारा गरम करने से इसमें प्रोटीन ऐसे तत्वों में बदल सकते हैं, जिनसे इन्हें पचाने में दिक्कत हो सकती है।



7. अंडे इसे उच्च तापमान पर दोबारा गर्म करने से यह टॉक्सिक हो जाता है। इसका नेगेटिव इफेक्ट डाइजेस्टिव सिस्टम पर हो सकता है।



Source - food bhaskar

बुधवार, 10 अगस्त 2016

रक्षाबंधन


रक्षाबंधन सामाजिक, पौराणिक, धार्मिक तथा ऐतिहासिक भावना के धागे से बना एक ऐसा पवित्र बंधन जिसे जनमानस में रक्षाबंधन के नाम से सावन मास की पूर्णिमा को भारत में ही नही वरन् नेपाल तथा मॉरिशस में भी बहुत उल्लास एवं धूम-धाम से मनाया जाता है। रक्षाबंधन अर्थात रक्षा की कामना लिए ऐसा बंधन जो पुरातन काल से इस सृष्टी पर विद्यमान है। इन्द्राणी का इन्द्र के लिए रक्षा कवच रूपी धागा या रानी कर्मवति द्वारा रक्षा का अधिकार लिए पवित्र बंधन का हुमायु को भेजा पैगाम और सम्पूर्ण भारत में बहन को रक्षा का वचन देता भाईयों का प्यार भरा उपहार है, रक्षाबंधन का त्योहार। 


प्राचीन काल से प्रसंग भले ही अलग-अलग हो परंतु प्रत्येक प्रसंग में रक्षा की ज्योति ही प्रज्वलित होती रही है। पुरातन काल में रक्षा की भावना का उद्देश्य लिए ब्राह्मण क्षत्रिय राजाओं को रक्षा सूत्र बांधते थे, जहाँ राजा और ज़मींदार जैसे शक्तिवान एवं धनवान लोग उन्हे सुरक्षा प्रदान करने के साथ जीवन उपयोगी वस्तुएं भी उपहार में दिया करते थे।

हमारी पौराणिक मान्यता के अनुसार एक बार राजा इन्द्र पर दानवों ने हमला कर दिया जिसमें राजा इन्द्र की शक्ति कमजोर पङने लगी। तब इन्द्र की पत्नी इन्द्राणी जिनका शशिकला नाम था, उन्होने ईश्वर के समक्ष तपस्या तथा प्रार्थना की। इन्द्राणी की तपस्या से प्रसन्न होकर ईश्वर ने शशिकला को एक रक्षा सूत्र दिया । इन्द्राणी ने उसे इन्द्र के दाहिने हाँथ में बाँध दिया, इस पवित्र रक्षा सूत्र की वजह से इन्द्र को विजय प्राप्त होती है। जिस दिन ये रक्षासूत्र बांधा गया था उस दिन सावन मास की पूर्णिमा थी। संभवतः इसीलिए रक्षाबंधन का पर्व आज-तक सावन मास की पूर्णिमा को ही मनाया जाता है।
पौराणिक कथा का अगर जिक्र करें तो, रक्षाबंधन से जुङा एक और रोचक प्रसंग बहुत महत्वपूर्ण है। एक बार राजा बली अपने यज्ञ तप की शक्ति से स्वर्ग पर आक्रमण करके सभी देवताओं को परास्त कर देते हैं, तो इन्द्र सहित सभी देवता भगवान विष्णु की शरण में जाते हैं और राजा बली से अपनी रक्षा की प्रार्थना करते हैं। तब विष्णु जी वामन अवतार में ब्राह्मण के रूप में राजा बली से भिक्षा मांगने जाते हैं और तीन पग भूमि दान में माँगते हैं। राजा बली उन्हे भूमि देने का वचन देते हैं, तभी वामन रूपी विष्णु जी तीन पग में सारा आकाश, पाताल और धरती नापकर राजा बली को रसातल में भेज देते हैं। रसातल में राजा बली अपनी भक्ती से भगवान विष्णु को प्रसन्न करके उनसे वचन ले लेते हैं कि भगवान विष्णु दिन-रात उनके सामने रहेगें। श्री विष्णु के वापस विष्णुलोक न आने पर परेशान लक्ष्मी जी को नारद जी सलाह देते हैं कि, आप राजा बली को भाई बनाकर उसको रक्षासूत्र बाँधिये। नारद जी की सलाह अनुसार माता लक्ष्मी बली को रक्षासूत्र बाँधती हैं और उपहार में भगवान विष्णु को माँगकर अपने साथ ले जाती हैं। ये संयोग ही है कि इस दिन भी सावन मास की पूर्णीमा थी। आज भी सभी धार्मिक अनुष्ठानों में यजमान को ब्राह्मण एक मंत्र पढकर रक्षासूत्र बाँधते हैं जिसका अर्थ होता है कि-
जिस रक्षा सूत्र से महान शक्तिशाली राजा बली को बाँधा गया था, उसी सूत्र से मैं आपको बाँध रहा हुँ, आप अपने वचन से कभी विचलित न होना।
रक्षाबंधन की परंपरा महाभारत में भी प्रचलित थी, जहाँ श्री कृष्ण की सलाह पर सैनिकों और पांडवों को रक्षा सूत्र बाँधा गया था। जब रक्षाबंधन के प्रचलन की बात की जाती है तो रानी कर्मवती द्वारा हुमायु को भेजे रक्षासुत्र को अनदेखा नही किया जा सकता, जिसे मुगल सम्राट ने समझा और निभाया भी।
आपसी सौहार्द तथा भाई-चारे की भावना से ओतप्रोत रक्षाबंधन का त्योहार हिन्दुस्तान में अनेक रूपों में दिखाई देता है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पुरूष सदस्य परस्पर भाई-चारे के लिए एक दूसरे को भगवा रंग की राखी बाँधते हैं। राजस्थान में ननंद अपनी भाभी को एक विशेष प्रकार की राखी बाँधती है जिसे लुम्बी कहते हैं। कई जगह बहने भी आपस में राखी बाँध कर एक दूसरे को सुरक्षा को भरोसा देती हैं। इस दिन घर में नाना प्रकार के पकवान और मिठाईयों के बीच घेवर (मिठाई) खाने का भी विशेष महत्व होता। रक्षा सूत्र के साथ अनेक प्रान्तों में इस पर्व को कुछ अलग ही अंदाज में मनाते हैं। महाराष्ट्र में ये त्योहार नारियल पूर्णिमा या श्रावणी के नाम से प्रचलित है। तमिलनाडु, केरल, महाराष्ट्र और उङिसा के दक्षिण भारतीय ब्राह्मण इस पर्व को अवनी अवित्तम कहते हैं। कई स्थानो पर इस दिन नदी या समुद्र के तट पर स्नान करने के बाद ऋषियों का तर्पण कर नया यज्ञोपवीत धारण किया जाता है। रक्षाबंधन के इस पावन पर्व का महत्तव इसलिए और अधिक हो जाता है क्योकि इसी दिन अमरनाथ की यात्रा सम्पूर्ण होती है, जिसकी शुरुवात गुरु पूर्णिमा से होती है।
रविन्द्रनाथ टैगोर ने तो, रक्षाबंधन के त्योहार को स्वतंत्रता के घागे में पिरोया। उनका कहना था कि, राखी केवल भाई-बहन का त्योहार नही है अपितु ये इंसामियत का पर्व है, भाई-चारे का पर्व है। जहाँ जातिय और धार्मिक भेद-भाव भूलकर हर कोई एक दूसरे की रक्षा कामना हेतु वचन देता है और रक्षा सुत्र में बँध जाता है। जहाँ भारत माता के पुत्र आपसी भेद-भाव भूलकर भारत माता की स्वतंत्रता और उसके उत्थान के लिए मिलजुल कर प्रयास करते।
रक्षा के नजरिये से देखें तो, राखी का ये त्योहार देश की रक्षा, पर्यावरण की रक्षा तथा लोगों के हितों की रक्षा के लिए बाँधा जाने वाला महापर्व है। जिसे धार्मिक भावना से बढकर राष्ट्रीय पर्व के रूप में मनाने में किसी को आपत्ति नही होनी चाहिए। भारत जैसे विशाल देश में बहने सीमा पर तैनात सैनिकों को रक्षासूत्र भेजती हैं एवं स्वंय की सुरक्षा के साथ उनकी लम्बी आयु और सफलता की कामना करती हैं। हमारे देश में राष्ट्रपति भवन में तथा प्रधानमंत्री कार्यालय में भी रक्षाबंधन का आयोजन बहुत उल्लास के साथ मनाया जाता है। प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को तो अक्सर कई लोगों ने देखा होगा बच्चों से राखी बँधवाते।
रक्षाबंधन एक ऐसा इकलौता त्योहार है जिसके लिए हमारे राष्ट्रीय डाकघर में एक विशेष लिफाफे को बहनों के लिए जारी किया गया है। लिफाफे की कीमत 5 रुपए और 5 रुपए डाक का शुल्क। इसमें राखी के त्योहार पर बहनें, भाई को मात्र पाँच रुपये में एक साथ तीन-चार राखियाँ तक भेज सकती हैं। डाक विभाग की ओर से बहनों को दिये इस तोहफे के तहत 50 ग्राम वजन तक राखी का लिफाफा मात्र पाँच रुपये में भेजा जा सकता है जबकि सामान्य 20 ग्राम के लिफाफे में एक ही राखी भेजी जा सकती है। यह सुविधा रक्षाबन्धन तक ही उपलब्ध रहती है। रक्षाबन्धन के अवसर पर बरसात के मौसम का ध्यान रखते हुए डाक-तार विभाग ने 2007 से बारिश से ख़राब न होने वाले लिफाफे भी उपलब्ध कराये हैं।
ये कहना अतिश्योक्ति न होगी कि, रक्षा की कामना लिये भाई-चारे और सदभावना का ये धार्मिक पर्व सामाजिक रंग के धागे से बंधा हुआ है। जहाँ लोग जातिय और धार्मिक बंधन भूलकर एक रक्षासूत्र में बंध जाते हैं।
“कच्चे धागे से बनी पक्की डोर है राखी।
प्यार और मिठी शरारतों के साथ, बहन की रक्षा का अधिकार है राखी।
जात-पात , भेद-भाव को मिटाती, एकता का पाठ है राखी।
भाई-बहन के विश्वास और ज़जबात का पवित्र रूप है राखी।“
रक्षाबंधन की हार्दिक बधाई
धन्यवाद

Sourece-achhikhabar

शनिवार, 30 जुलाई 2016

लो कैलोरी खांडवी...




खांडवी... 

लो कैलोरी खांडवी हेल्दी ऑप्शन है। आप चाहें तो इसे मेन कोर्स में साइड डिश के तौर पर सर्व करें या ब्रेकफास्ट में खाएं।... 
सामग्री : 

  •  कढ़ी पत्ते - थोड़े से
  •  नारियल - 1 किसा हुआ 
  • पानी - 2 कप 
  • हरी मिर्च - 3 टुकड़ों में कटी हुई
  •  नमक - स्वादानुसार 
  • तेल - ½ छोटा चम्मच 
  • हल्दी पाउडर - ¼... 
  • दही - 1 कप 
  • बेसन - 1 कप... 

छिपकली भगाने के घरेलु तरीके



कैसे बनाएं 

STEP 1. एक बाउल में दही डालकर फेंट लें। इसमें बेसन, पानी, नमक और हल्दी पाउडर डालकर अच्छी तरह मिला लें ताकि गांठें न पड़ें।... 

STEP 2.एक पैन में इस मिश्रण को डालें और गैस पर रखें। इसे मध्यम आंच पर गाढ़ा होने तक लगातार चम्मच से हिलाते रहें। अब गैस बंद कर दें और मिश्रण को कुछ देर और हिलाएं। एक प्लेट पर हल्का सा तेल लगाएं और उसमें इस मिश्रण को फैला लें।... 

STEP 3. इसके ऊपर किसा हुआ नारियल और हरा धनिया डालें। इसे पतली स्ट्रीप्स में काटें और रोल कर लें। एक पैन में तेल गर्म कर लें। उसमें कढ़ी पत्ता और राई डालें। इस छौंक को तैयार रोल पर डालें। गार्निश करने के लिए किसा हुआ नारियल और हरा धनिया मिलाएं।... 
Source - bhaskar

शुक्रवार, 29 जुलाई 2016

नागपंचमी भैया पंचमी महत्व, कथा व्रत पूजा विधी

नागपंचमी महत्व कथा अवम व्रत पूजा विधि  के बारे में सभी जानकारी एकत्र की गई हैं जिसे पढ़कर आप नाग पंचमी की पूजा कर सकते हैं |


नागपंचमी भैया पंचमी महत्व, कथा व्रत पूजा विधी

नाग पंचमी महत्त्व

नाग पंचमी का त्यौहार सावन में मनाया जाता हैं श्रावण में शुक्ल पक्ष की पंचमी को नाग देवता की पूजा की जाती हैं | रिवाजानुसार इस दिन नाग/ सर्प को दूध पिलाया जाता हैं | गाँव में नाग पंचमी के दिन मेला सजता हैं जिसमे झूले लगते हैं | पहलवानी का खेल कुश्ती भी नाग पंचमी की एक विशेषता हैं | कई स्थानों पर नाग पंचमी के दिन विवाहित बेटियों को मायके में बुलाया जाता हैं | उनके परिवार को भोजन करवा कर दान दिया जाता हैं | साथ ही खेत के मालिक अन्य पशुओं जैसे बैल, गाय भैस आदि की भी पूजा करते हैं |साथ ही फसलो की भी पूजा की जाती हैं |
नाग पंचमी पूजा विधी
नाग पंचमी की पूजा का नियम सभी का अलग होता हैं कई तरह की मान्यता होती हैं | एक तरह की नाग पंचमी पूजा विधी यहाँ दी गई हैं |
  • सुबह सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान किया जाता हैं | निर्मल स्वच्छ वस्त्र पहने जाते हैं |
  • भोजन में सभी के अलग नियम होते हैं अवम उन्ही के अनुसार भोग लगाया जाता हैं | कई घरों में दाल बाटी बनती हैं | कई लोगो के यहाँ खीर पुड़ी बनती हैं | कईयों के यहाँ चावल बनाना गलत माना जाता हैं | कई परिवार इस दिन चूल्हा नहीं जलाते अतः उनके घर बासा खाने का नियम होता हैं | इस तरह सभी अपने हिसाब से भोग तैयार करते हैं |
  • इसके बाद पूजा के लिए घर की एक दीवार पर गेरू एक विशेष पत्थर से लेप कर एक हिस्सा शुद्ध किया जाता हैं | यह दीवार कई लोगो के घर की प्रवेशद्वार होती हैं तो कई के रसौई घर की दीवार | इस छोटे से भाग पर कोयले एवं घी से बने काजल की तरह के लेप से एक चौकोर डिब्बा बनाया जाता हैं | इस डिब्बे के अन्दर छोटे छोटे सर्प बनाये जाते हैं | इस तरह की आकृति बनाकर उसकी पूजा की जाती हैं |
  • कई परिवारों के यहाँ यह सर्प की आकृति कागज पर बनाई जाती हैं |
  • कई परिवार घर के द्वार पर चन्दन से सर्प की आकृति बनाते हैं | एवं पूजा करते हैं |
  • इस पूजा के बाद घरों में सपेरे को लाया जाता हैं जिनके पास टोकनी में सर्प होता हैं जिसके दांत नहीं होते साथ ही इनका जहर निकाल दिया जाता हैं | उनकी पूजा की जाती हैं | जिसमे अक्षत, पुष्प, कुमकुम, दूध एवं भोजन का भोग लगाया जाता हैं |
  • सर्प को दूध पिलाने की प्रथा हैं |
  • सपेरे को दान दिया जाता हैं |
  • कई लोग इस दिन कीमत देकर सर्प को सपेरे के बंधन से मुक्त भी करते हैं |
  • इस दिन बाम्बी के भी दर्शन किये जाते हैं | बाम्बी सर्प के रहने का स्थान होता हैं | जो मिट्टी से बना होता हैं उसमे छोटे- छोटे छिद्र होते हैं | यह एक टीले के समान दिखाई देता हैं |
इस प्रकार नाग पंचमी की पूजा की जाती हैं | फिर सभी परिवारजनों के साथ मिलकर भोजन करते हैं |


शिव को प्रसन्‍न करने के लिए ........


नाग पंचमी पर पौराणिक कथा :क्यूँ पड़ा नाग पंचमी का नाम भैया पंचमी (Nag Panchami Bhaiya Panchami Katha )
नगर का एक सेठ था उसके चार पुत्र थे | सभी का विवाह हो चूका था | तीन पुत्र की पत्नियों का मायका बहुत सम्पन्न था उसे धन धान की कोई कमी ना थी लेकिन चौथी के परिवार में कोई नहीं था उसका विवाह किसी रिश्तेदार ने किया था | अन्य तीन बहुए अपने घरो से कई उपहार लाती थी और छोटी बहु को ताने मारती थी | लेकिन छोटी बहुत स्वाभाव से बहुत अच्छी थी उस पर इन बातों का प्रभाव नहीं पड़ता था |
एक दिन बड़ी बहु से सभी बहुओं को साथ चल कर कुछ पौधे लगाने को कहा | सभी साथ गई और बड़ी बहु ने खुरपी से गड्डा करने के लिए जैसे ही उठाया | उस वक्त वहां एक सर्प आ गया उसने उसे मारने की सोची लेकिन छोटी बहु ने उसे रोक दिया कहा दीदी यह बेजुबान जानवर हैं इसे ना मारे | तब सर्प की जान बच गई | कुछ वक्त बाद सर्प छोटी बहु के स्वपन में आया और उसने उससे कहा तुमने मेरी जान बचाई इसलिए तुम जो चाहों मांग लो तब छोटी बहु ने सर्प को उसका भाई बनने का कहा | सर्प ने छोटी बहु को अपनी बहन स्वीकार किया |
कुछ दिनों बाद सारी बहुयें अपने- अपने मायके गई और वापस आकर छोटी बहु को ताना मारने लगी | तब ही छोटी बहु को उस स्वपन का ख्याल आया और उसने मन ही सर्प को याद किया |
एक दिन वह सर्प मानव रूप धर के छोटी बहु के घर आया और उसने सभी को यकीन दिलाया कि वो छोटी बहु का दूर का भाई हैं | और उसे अपने साथ मायके ले जाने आया | परिवार वालो ने उसे जाने दिया | रास्ते में सर्प ने छोटी बहु को अपना वास्तविक परिचय दिया | और उसे शान से घर लेकर गया | जहाँ बहुत धन धान्य था | सर्प ने अपनी बहन को बहुत सा धन, जेवर देकर मायके भेजा | जिसे देख बड़ी बहु जल गई और उसने छोटी बहु के पति को भड़काया और कहा कि छोटी बहु चरित्रहीन हैं | इस पर पति ने छोटी बहु को घर से निकालने का निर्णय लिया | तब छोटी बहु ने अपने भाई सर्प को याद किया | सर्प उसी वक्त उसके घर आया और उसने सभी को कहा कि अगर किसी ने मेरी बहन पर आरोप लगाया तो वो सभी को डस लेगा | इससे वास्तविक्ता सामने आई और इस प्रकार भाई ने अपना फर्ज निभाया | तब ही से सर्प की पूजा सावन की शुक्ल पंचमी के दिन की जाती हैं | लडकियाँ सर्प को अपना भाई मानकर पूजा करती हैं | धन्य धान की पूर्ति हेतु भी सर्प की पूजा की जाती हैं |
Nag Panchami Vrat (नाग पंचमी व्रत विधान )
नाग पंचमी सावन की शुक्ल पंचमी को मनाई जाती हैं उस समय कई लोग सावन के व्रत करते हैं | जिसमे कई लोग धन धान्य की ईच्छा से नाग पंचमी व्रत करते हैं | इस दिन नाग देवता के मंदिर में श्री फल चढ़ाया जाता हैं |
ॐ कुरुकुल्ये हुं फट् स्वाहा श्लोक का उच्चारण कर सर्प का जहर उतारा जाता हैं |सर्प के प्रकोप से बचने के लिए नाग पंचमी की पूजा की जाती हैं |
Source - deepawali

सोमवार, 25 जुलाई 2016

रंग-बिरंगे रसगुल्ले


मेहमानों का मुंह मीठा करने के लिए स्वीट के रूप में रंग के गोले बनाइए। तैयार रसगुल्ले से यह मिठाई कम समय में बनाई जा सकती है।




सामग्री : 
  •  नारियल बूरा - 1 ½ कप
  •  छोटे रसगुल्ले - 10 
  • केसर - 10 रेशे, एक चम्मच दूध में घुले हुए 
  • केसर - 1 छोटा चम्मच, एक चम्मच पानी में घुला हुआ 
  • पिस्ते की कतरन - 100 ग्राम
  •  लाल गुलाब की पत्तियां - 200 ग्राम... 
STEP 1. चार अलग-अलग बाउल में दो बड़े चम्मच नारियल का बूरा डालें। अब पहले वाले नारियल बूरे में पानी में घुला केसर डालें। दूसरे बाउल में दूध में घुला हुअा केसर मिलाएं। तीसरे बाउल में गुलाब की पत्तियों का रस डालें।

 STEP 2. चौथे बाउल के बूरे में पिस्ते की कतरन डालकर अच्छी तरह मिला लें। इस तरह नारियल का बूरा रंगीन हो जाएगा। अब रसगुल्ले को रंगीन नारियल बूरे से कवर करके सर्व करें।
Source- food.bhaskar

मंगलवार, 19 जुलाई 2016

हिन्दी जोक्स | Hindi Jokes



Men will be Men

किसी आदमी की लंबी तपस्या के बाद अप्सरा प्रगट हुई।

उसने कहा की मैं तुम्हारी तीन इच्छाएं पूरी कर सकती हूं।

एक मैं जानती हुं बाकी की दो बताओ।
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बचपन मे डराया जाता था की

मेंढक को पत्थर मरोगे तो गूंगी पत्नी मिलेगी..

कितना डरते थे तब…

अब लगता है काश मार ही दिया होता..
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डॉक्टर : कल रात को क्या खाया था??

लड़का : बर्गर, पिज़्ज़ा और कोक..

डॉक्टर : देखो यह फ़ेसबुक नही है सच बताओ..

लड़का : जी लौकी..
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पति पत्नी जोक्स


एक शादीशुदा जोड़ा बाग में टहल रहा था

अचानक एक बड़ा सा कुत्ता उनकी तरफ झपटा,

दोनों को ही लगा कि ये उन्हें काट लेगा। बचने का कोई रास्ता न देख पति ने तुरंत ‘अपनी पत्नी को’ गोद में ऊपर तक उठा लिया
ताकि …..कुत्ता काटे तो उसे काटे उसकी पत्नी को नही।

कुत्ता बिलकुल नज़दीक आकर रुका, कुछ देर तो भौंका और फिर पीछे की तरफ भाग गया।

पति ने चैन की सांस ली और इस उम्मीद में पत्नी को गोद से उतारा कि पत्नी उसे गले लगाएगी

तभी उसकी तमाम उम्मीदों पर पानी फेरते हुए….

उसकी बीवी चिल्लाई…”मैंने आज तक लोगों को कुत्ते को भगाने के लिए पत्थर या डंडा फेंकते तो देखा था
पर ऐसा आदमी पहली बार देख रही हूँ जो कुत्ते को भगाने के लिए ….अपनी बीवी को फेंकने के लिये तैयार था।”

“शिक्षा” :-
शादी शुदा लोगो को अपनी बीवियों से कभी तारीफ की उम्मीद नहीं करनी चाहिए |

शुक्रवार, 15 जुलाई 2016

पपीते और एलो वेरा जैल से पाएं साफ और गोरी त्‍वचा

चेहरे को अगर साफ, दमकता और खूबसूरत बनाना हो तो घर में उपलब्‍ध चीजों का ही प्रयोग करना चाहिये। कहते हैं कि पपीते के चेहरे पर लगाने से चेहरे में चमक आती है और अगर बात करें एलो वेरा जैल की तो, उससे स्‍किन की काफी सारी बीमारियां दूर होती हैं। 



आज हम आपको पपीते और एलो वेरा जैल से तैया फेस पैक बनाना सिखाएंगे, जो आपके ऑइली स्‍किन के लिये बहुत अच्‍छा होता है।
 सामग्री-

  •  ½ पपीता 
  • 1 चम्‍मच एलोवेरा का ताजा 

जेल बनाने की विधि - 
एलोवेरा जैल और पके पपीते के थोड़े से टुकड़ों को मिक्‍सर में डाल कर ब्‍लेड कर दें। फिर इस पेस्‍ट को चेहरे पर लगाएं और 20 मिनट के लिये छोड़ दें। पेस्‍ट सूख जाने के बाद हल्‍के गरम पानी तथा साबुन से धो लें।


Tips for Glowing Skin | ग्लोइंग स्किन टिप्स


Source -  hindi.boldsky

गुरुवार, 14 जुलाई 2016

देवशयनी एकादशी | Devshayani Ekadashi

आषाढ़ शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवशयनी एकादशी कहते हैं। देवशयनी एकादशी के दिन से भगवान विष्णु का शयनकाल प्रारम्भ हो जाता है इसीलिए इसे देवशयनी एकादशी कहते हैं। देवशयनी एकादशी के चार माह के बाद भगवान् विष्णु प्रबोधिनी एकादशी के दिन जागतें हैं।

जानिए क्यों वर्जित हैं देवशयन में मांगलिक कार्य ..
जब भगवान विष्णु ने वामन अवतार लेकर बलि से तीन पग भूमि मांगी। दो पग में पृथ्वी और स्वर्ग को नापा और जब तीसरा पग रखने लगे तब बलि ने अपना सिर आगे कर दिया। तब भगवान ने बलि को पाताल भेज दिया तथा उसकी दानभक्ति को देखते हुए आशीर्वाद मांगने को कहा। बलि ने कहा कि प्रभु आप सभी देवी-देवताओं के साथ मेरे लोक पाताल में निवास करें। इस कारण भगवान विष्णु को सभी देवी-देवताओं के साथ पाताल जाना पड़ा। यह दिन था विष्णुशयनी (देवशयनी) एकादशी का। इस दिन से सभी मांगलिक कार्यों के दाता भगवान विष्णु का पृथ्वी से लोप होना माना जाता है। यही कारण है कि इन चार महीनों में हिंदू धर्म में कोई भी मांगलिक कार्य करना वर्जित है।

सत्य का मार्ग

देवशयनी एकादशी कथा :-
युधिष्ठिर ने पूछा : भगवन् ! आषाढ़ के शुक्लपक्ष में कौन सी एकादशी होती है ? उसका नाम और विधि क्या है? यह बतलाने की कृपा करें ।
भगवान श्रीकृष्ण बोले : राजन् ! आषाढ़ शुक्लपक्ष की एकादशी का नाम ‘शयनी’ है। मैं उसका वर्णन करता हूँ । वह महान पुण्यमयी, स्वर्ग और मोक्ष प्रदान करनेवाली, सब पापों को हरनेवाली तथा उत्तम व्रत है । आषाढ़ शुक्लपक्ष में ‘शयनी एकादशी’ के दिन जिन्होंने कमल पुष्प से कमललोचन भगवान विष्णु का पूजन तथा एकादशी का उत्तम व्रत किया है, उन्होंने तीनों लोकों और तीनों सनातन देवताओं का पूजन कर लिया । ‘हरिशयनी एकादशी’ के दिन मेरा एक स्वरुप राजा बलि के यहाँ रहता है और दूसरा क्षीरसागर में शेषनाग की शैय्या पर तब तक शयन करता है, जब तक आगामी कार्तिक की एकादशी नहीं आ जाती, अत: आषाढ़ शुक्ल पक्ष की एकादशी से लेकर कार्तिक शुक्ल एकादशी तक मनुष्य को भलीभाँति धर्म का आचरण करना चाहिए । जो मनुष्य इस व्रत का अनुष्ठान करता है, वह परम गति को प्राप्त होता है, इस कारण यत्नपूर्वक इस एकादशी का व्रत करना चाहिए । एकादशी की रात में जागरण करके शंख, चक्र और गदा धारण करनेवाले भगवान विष्णु की भक्तिपूर्वक पूजा करनी चाहिए । ऐसा करनेवाले पुरुष के पुण्य की गणना करने में चतुर्मुख ब्रह्माजी भी असमर्थ हैं ।
राजन् ! जो इस प्रकार भोग और मोक्ष प्रदान करनेवाले सर्वपापहारी एकादशी के उत्तम व्रत का पालन करता है, वह जाति का चाण्डाल होने पर भी संसार में सदा मेरा प्रिय रहनेवाला है । जो मनुष्य दीपदान, पलाश के पत्ते पर भोजन और व्रत करते हुए चौमासा व्यतीत करते हैं, वे मेरे प्रिय हैं । चौमासे में भगवान विष्णु सोये रहते हैं, इसलिए मनुष्य को भूमि पर शयन करना चाहिए । सावन में साग, भादों में दही, क्वार में दूध और कार्तिक में दाल का त्याग कर देना चाहिए । जो चौमसे में ब्रह्मचर्य का पालन करता है, वह परम गति को प्राप्त होता है । राजन् ! एकादशी के व्रत से ही मनुष्य सब पापों से मुक्त हो जाता है, अत: सदा इसका व्रत करना चाहिए । कभी भूलना नहीं चाहिए । ‘शयनी’ और ‘बोधिनी’ के बीच में जो कृष्णपक्ष की एकादशीयाँ होती हैं, गृहस्थ के लिए वे ही व्रत रखने योग्य हैं – अन्य मासों की कृष्णपक्षीय एकादशी गृहस्थ के रखने योग्य नहीं होती । शुक्लपक्ष की सभी एकादशी करनी चाहिए ।

सोमवार, 11 जुलाई 2016

भूलकर भी न रखें ये चीजें , फ्रिज में



कॉफी-
कॉफी को भी फ्रिज में नहीं रखना चाहिए। फ्रिज में रखने से ये उसमें रखी दूसरी चीजों का महक सोख लेता है और जल्दी खराब हो जाता है।

शहद-
शहद को कभी फ्रिज में नहीं रखना चाहिए। शहद तो पहले से ही प्रिजर्व रहता है। इसे आप सामान्य तौर पर ही जार में बंद करके रख देंगे तो वो भी वो सालो-साल चलेगा। फ्रिज में रखने से वो क्रिस्टल बन जाता है और उसे जार से निकालना मुश्किल हो जाता है।

अचार-
अचार में विनेगर होता है, इसको फ्रिज में रखने से ये अपने साथ- साथ दूसरी चीजों को भी खराब कर देता है।

केला-
केले को फ्रिज में रखने से ये काला पड़ने लगता है। इससे ईथाइलीन नाम की गैस निकलती है जिससे ये अपने आसपास रखे फलों को भी खराब कर देता है।

टमाटर-
टमाटर फ्रिज में रखने से ये जल्दी गल जाता है और इसका टेस्ट खराब होने लगता है।

आलू-
आलू को फ्रिज में रखने से इसका स्टार्च शुगर में बदलने लगता है। इससे उसके स्वाद पर भी असर पड़ता है।

खट्टे फल-
संतरा, नींबू, मौसमी जैसे फल भी फ्रिज में नहीं रखने चाहिए। अगर आप इसे फ्रिज में रखते हैं तो इसके छिलके काले पड़ जाते हैं और इसका रस सूखने लगता है।

तरबूज और खरबूज-
बिना कटा हुआ तरबूज और खरबूज फ्रिज में नहीं रखना चाहिए। इसमें काफी मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट होता है जो फ्रिज में रखने से खराब होने लगता है।

प्याज-

प्याज को भी फ्रिज में नहीं रखना चाहिए क्योंकि फ्रिज की नमी के कारण ये गल कर खराब होने लगता है।

लहसुन-
लहसुन को फ्रिज में रखने से ये जल्दी अंकुरित होने लगता है और ढीला पड़कर खराब हो जाता है।

तेल-
कुछ तेल जैसे नारियल और ऑलिव ऑयल को फ्रिज में नहीं रखना चाहिए। फ्रिज में रखने पर वो गाढ़ा हो जाता है और फ्रिज में से निकालने पर सामान्य तापमान पर आने के लिए इसे काफी समय लगता है।